ऑटो टिपर घोटाले में निगरानी टीम ने नगर आयुक्त संजय दूबे का तीन घंटे तक दर्ज किया बयान

मुजफ्फरपुर, ऑटो टिपर घोटाले में गुरुवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की तीन सदस्यीय टीम ने नगर आयुक्त संजय दूबे का बयान दर्ज किया। करीब तीन घंटे तक केस के आईओ सह निगरानी इंस्पेक्टर मो. खलील ने उनका विधिवत बयान लिया। साथ ही ऑटो टिपर की खरीद-बिक्री के टेंडर से लेकर भुगतान से संबंधित तमाम जानकारियां ली।

दोपहर करीब एक बजे निगरानी मुजफ्फरपुर के प्रभारी सह डीएसपी कामोद प्रसाद के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम नगर निगम पहुंची। नगर आयुक्त से करीब एक दर्जन से अधिक बिंदुओं पर जानकारी ली। आईओ ने उनके बयान को अपने दैनिकी में दर्ज किया। टेंडर प्रक्रिया से लेकर आपूर्तिकर्ता कंपनी को हुए भुगतान और टेंडर रद करने की प्रक्रिया को बारीकी से जाना। शाम करीब चार बजे बयान दर्ज कर टीम निकल गई।

ऑटो टिपर खरीद की टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत के आलोक में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के एसपी सुबोध विश्वास व डीएसपी कामोद प्रसाद ने जांच की थी। इसमें एक दर्जन से अधिक बिन्दुओं पर अनियमितता व विभागीय मानकों की अनदेखी पाई गई थी। इसके बाद एसपी ने इसकी रिपोर्ट नगर विकास व आवास मंत्रालय को भेजी। साथ ही वित्तीय आपराधिक मामलों के तहत कार्रवाई की अनुशंसा भी की। इसे लेकर 12 दिसंबर को पटना स्थित निगरानी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।

वर्ष 2017-18 में निगम ने 50 ऑटो टिपर की खरीदारी को लेकर टेंडर निकाला था। टेंडर प्रक्रिया के बाद पटना की एक एजेंसी को सप्लाई को लेकर तत्कालीन नगर आयुक्त ने आदेश जारी किया था। इस बीच टेंडर प्रक्रिया में शामिल एक अन्य कंपनी ने निगरानी में शिकायत कर दी। बताया कि शिकायतकर्ता कंपनी ने निविदा से कम दर पर टेंडर दी थी, लेकिन व्यक्तिगत लाभ पहुंचाते हुए दूसरी कंपनी को आपूर्ति का आदेश दे दिया गया।

निविदा के बाद पटना की एजेंसी ने नगर निगम को 24 टिपर की आपूर्ति की। इस बीच 17 दिसंबर 2017 को तत्कालीन नगर आयुक्त रमेश रंजन का तबादला हो गया। 18 दिसंबर 2017 को डॉ. रंगनाथ चौधरी को नगर निगम का प्रभारी नगर आयुक्त नियुक्त किया गया। उन्होंने 3.85 करोड़ रुपये का भुगतान आदेश दिया, जबकि निगम के लिए भुगतान लिमिट 3.50 करोड़ ही है।

ऑटो टिपर खरीद के लिए निकाले गए टेंडर में मुजफ्फरपुर, पटना और हरियाणा की एक-एक कंपनी ने हिस्सा लिया था। इसमें मुजफ्फरपुर की कंपनी ने सबसे कम दर (मेंटेनेस के साथ) पर निविदा डाली थी। एक टिपर के लिए 7.65 लाख राशि का प्रोपजल दिया था। वहीं पटना की कंपनी ने बिना मेंटेनेंस के 7.70 लाख रुपये की निविदा डाली थी जबकि हरियाणा की कंपनी ने सबसे महंगी दर पर टेंडर डाला था।

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