चीन के नियंत्रण रेखा पर अपने सैनिकों की संख्या को कम नहीं करेगा भारत – निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत “वुहान” समझौते की भावना के अनुसार सीमा पर शांति बनाए रखेगा लेकिन चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपने सैनिकों की संख्या को कम नहीं करेगा।

अपने चीनी समकक्ष वेई फेंघे के साथ बातचीत के लगभग एक महीने बाद सीतारमण ने कहा कि दोनों पक्षों ने स्वीकार किया है कि वुहान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में किये गए व्यापक निर्णय से सीमा प्रबंधन नियंत्रित होना चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि क्या भारत अब भी सैनिकों को तैनात रखे हुए है और वुहान की भावना के बावजूद उसमें कमी नहीं ला रहा है तो उन्होंने कहा, ‘बिल्कुल।’

बतादे कि अप्रैल में वुहान शिखर सम्मेलन में मोदी और शी ने संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करने का संकल्प लिया और अपनी सेनाओं को लगभग 3,500 किमी लंबी चीन-भारत सीमा पर समन्वय को बढ़ाने का निर्देश दिया। परमाणु हथियारों से संपन्न दोनों देशों के बीच डोकलाम में सैन्य गतिरोध पैदा होने के कुछ ही महीने बाद यह संकल्प लिया गया था।

यह पूछे जाने पर कि सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए दोनों सेनाओं को सामरिक दिशा-निर्देश जारी करने का मोदी और शी का निर्णय क्या काम कर रहा है तो उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि यह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के रक्षा मंत्री के रूप में वह इस तथ्य से अवगत हैं कि उन्हें सीमा प्रहरियों को सतर्क रखना होगा।

भारत के अपनी पश्चिमी सीमा से अपनी उत्तरी सीमा पर ध्यान केंद्रित करने का समय आ जाने के बारे में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के इस साल के बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मैं एक सीमा की कीमत पर यह नहीं कह सकती कि मैं दूसरी सीमा पर अधिक सतर्क और तैयार रहूंगी। सीमा, सीमा है। मुझे अपनी दोनों सीमाओं के बारे में सचेत रहना होगा। मुझे अपने सागरों के बारे में भी सचेत रहना होगा। इस बारे में कम चर्चा होती है।

पिछले महीने सीतारमण और उनके चीनी समकक्ष वेई ने यहां व्यापक वार्ता की थी, जिसमें उन्होंने रक्षा सहयोग पर एक नये द्विपक्षीय समझौते को ठोस रूप देने की दिशा में काम करने का फैसला किया और डोकलाम जैसे गतिरोध से बचने के लिए विभिन्न स्तरों पर अपनी सेनाओं के बीच बातचीत बढ़ाने के लिए सहमति व्यक्त की।

सीतारमण ने कहा कि यह (वुहान) भावना है, जिसे चीनी पक्ष और हम स्वीकार करते हैं, हमें अपनी सीमाओं को नियंत्रित करना होगा। चीनी मंत्री ने वुहान भावना का दो से अधिक बार उल्लेख किया और कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि यह भावना हर चीज को नियंत्रित करेगी। रक्षा मंत्री ने जून में सिंगापुर में शांगरी-ला वार्ता में दिये गए मोदी के भाषण का भी उल्लेख किया और कहा कि क्षेत्र के बारे में उनके विचारों का चीन ने भी स्वागत किया।

रक्षा और रणनीतिक मामलों के सम्मेलन में मोदी ने अपने भाषण में कहा कि एशिया और दुनिया का बेहतर भविष्य तब होगा जब भारत और चीन एक-दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशील होकर भरोसे और आत्मविश्वास के साथ मिलकर काम करेंगे। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बारे में बात करते हुए सीतारमण ने कहा कि यह पूरी तरह से निर्धारित नहीं है, दोनों पक्षों की इस बारे में अलग-अलग धारणाएं हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां सीमा पूरी तरह परिभाषित और निर्धारित नहीं है। नतीजतन, सीमा के बारे में हमारी धारणा अलग है और उनकी बिल्कुल भिन्न है। इसलिए वे एक ऐसे बिंदु पर आते हैं जहां हमें लगता है कि उन्हें नहीं आना चाहिए और हम उस बिंदु पर जाते हैं जहां उन्हें लगता है कि हमें नहीं जाना चाहिए। इसलिए समय-समय पर यह भड़कने का कारण बन जाता है।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *