झारखंड के धनबाद में भू-धंसान से सांसत में हैं लोग

धनबाद/रांची, कोयलानगरी धनबाद की जनता भू-धंसान से परेशान है। रह-रह के यहां होनेवाली भू-धंसान की घटनाएं क्षेत्र की जनता को गमजदा करती रहती है, लेकिन आजीविका के कारण वे कहीं और नहीं जा पाते। शुक्रवार को निरसा में कोयले के उत्खनन स्थल पर अचानक भू-धंसान हुआ और करीब डेढ़ सौ फुट के दायरे में जमीन धंस गई। शुक्र यही था कि यह घटना घनी आबादी से 50 मीटर दूर घटी, नहीं तो कई लोगों की जान जा सकती थी। पर इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि घनी आबादी वाला एरिया कभी भी भू-धंसान की चपेट में आ सकता है।

झारिया कोयलांचल में तो रह-रह के भू-धंसान की घटनाएं होती रहती हैं। हाल ही में नौ मार्च को सुदामडीह में भू धंसान में एक दर्जन घर ध्वस्त हो गए तो वहीं 13 मार्च को बोका पहाड़ी इलाका कांप उठा। यहां करीब 50 फुट व्यास का गोफ हो गया। झरिया में सड़क फटने की भी घटनाएं हो चुकीं हैं। यहां के वाशिंदे अपने घरौंदों में भी सुरक्षित नहीं हैं। करीब सौ वर्षों से दहक रही आग आज तक नहीं बुझी है। कई क्षेत्रों में आग ने अंदर के कोयले को खाक कर इसे खोखला बना दिया है। इस कारण अक्सर जमीन धंसती रहती है।

झरिया पुनर्वास विकास प्राधिकार से वर्षों से लोगों को यही आस है कि वह उनके दर्द पर मरहम लगा पुनर्वास कर दे। पर, पुनर्वास की धीमी रफ्तार से तो यही साबित हो रहा है कि दिल्ली अभी दूर है। गौरतलब है कि पांच फरवरी 2016 को सुदामडीह में हुए भू धंसान में जीरा देवी मकान समेत जमींदोज हो गयी थीं। जमीन के भीतर कोयले में लगी आग के कारण धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन के डायवर्सन की योजना पर काम चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस रेल लाइन के नीचे भूमिगत आग फैल चुकी है और बिना डायवर्सन के इसे बचाना संभव नहीं है।

इसे लेकर 13 फरवरी को कोयला सचिव सुशील कुमार की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। इसमें डीजीएमएस की अध्यक्षता में रेल लाइन के नीचे भूमिगत आग पर एक रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया। बैठक में रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि बीसीसीएल की असुरक्षित माइनिंग के कारण यह स्थिति बनी है। इधर भू-धंसान की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार ने कवायद तेज कर दी है। जेआरडीए के आरएंडआर प्रभारी एडीएम विजय कुमार गुप्ता ने बीसीसीएल के डीटी (योजना एवं परियोजना) को पत्र लिखकर प्रभावित परिवारों की सूची मांगी है। सूची मिलने के बाद प्रभावितों के लिए झरिया विहार बेलगड़िया फेज दो में आवास आवंटित किया जाएगा।

अग्नि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए बेलगड़िया में झरिया विहार नाम से टाउनशिप का निर्माण किया गया था। इस टाउनशिप में 2352 आवास थे। सभी आवास आवंटित कर दिए जाने के कारण पिछले दो-तीन साल से झरिया पुनर्वास में ठहराव सा आ गया है। अब बेलगड़िया में ही और करीब 500 आवास बनकर तैयार हैं। इनमें प्रभावित परिवारों का पुनर्वास प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। केंद्रीय कोयला सचिव की अध्यक्षता में 13 फरवरी को हुई हाई पावर कमेटी की बैठक में पुनर्वास लिए कट ऑफ डेट 28 अगस्त 2004 तय किया गया था।

तब कहा गया था कि प्राथमिकता के आधार पर वैसे लोगों का पुनर्वास किया जाएगा तो प्रभावित क्षेत्र में अगस्त 2004 के पहले से गुजर-बसर कर रहे हैं। गौरतलब है कि झरिया की खदान में 1916 में सबसे पहले आग लगी थी। आज करीब 70 जगहों पर आग निकल रही है। यहां की आग बुझाने के लिए 1978 में 20 अरब 85 करोड़ की योजना बनी थी। 1983 में यह बढ़कर पचास अरब 80 करो़ड़ और 1985 में 90 अरब 73 करोड़ हो गयी। इसमें आग बुझाने और सात छोटे टाउनशिप बसाने का प्लान बनाया गया। पहले चरण में रिमोट सेंसिंग के सहारे आग बुझाई जाती थी, इसके बाद नाइट्रोजन फॉगिंग कर आग बुझाने की कोशिश हुई।

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