पाइपलाइन के जरिए गंगा के पानी को गया ले जाया जाएगा – नीतीश कुमार

पटना, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि गंगा के पानी को गया ले जाया जाएगा। इसके लिए पाइप का उपयोग होगा। राशि चाहे जो भी खर्च हो, इस पर योजना बनेगी और उसपर काम होगा। यह योजना पहले भी बनी थी, लेकिन उस समय अधिकारियों ने इसे अव्यवहारिक बता दिया था। राशि के नाम पर इसे अव्यवहारिक बताने वाले देख लें कि गया में टैंकर से पानी देने पर हर साल कितनी राशि खर्च हो रही है।

शनिवार को बिहार विधानमंडल के विस्तारित भवन सेंट्रल हॉल में राज्य में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाजनक स्थिति विषय पर आयोजित सर्वदलीय विमर्श के समापन भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान व बुद्ध की भूमि गया की समस्या पर अक्सर चर्चा होती है। गर्मी में गया में भारी जलसंकट होता है।

पर्यटकों की संख्या को देखते हुए ख्याल आया कि क्यों न गंगा का पानी गया तक ले जाया जाए। कम पानी वाले इलाकों में पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाकर उसका संरक्षण व उपयोग की व्यवस्था होगी। ईमानदार प्रयास करने की जरूरत है। राजगीर, भागलपुर सहित अन्य शहरों में भी ऐसी योजनाएं बनाई जा सकती है।

इस योजना को अव्यवहारिक बताने वाले भूल रहे हैं कि दिल्ली में कहां-कहां से पानी आता है। बिहार में अभी जलसंकट भयावह स्थिति में नहीं हैं। लेकिन अगर जलसंकट पर काम अभी से शुरू हुआ और हम सचेष्ट हो गए तो हम उस खतरे से दूर हो जाएंगे। अगर योजना कारगर रही तो देश के दूसरे राज्य बिहार की योजना का अध्ययन करने आएंगे।

सीएम ने कहा था कि धरती हमारी जरूरतों को पूरा कर सकती है, लालच को नहीं। कुछ लोगों की विचित्र मानसिकता होती है। सरकारी पैसे से काम होने पर उसमें हेर-फेर करने में बाज नहीं आते हैं। भले ही उन पर कार्रवाई हो, जेल ही क्यों न चले जाएं। इसलिए सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सबों को नजर रखने की जरूरत है। अभी गंगा से सटे जिलों में जैविक सब्जी की खेती शुरू की गई है। सब्जी की तर्ज पर अन्य खेती होगी। अनुदान उपलब्ध कराने पर विचार होगा।

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