बिहार के सीतामढ़ी में कुख्यात संतोष झा की सीजेएम कोर्ट परिसर में गोली मारकर हत्या

सीतामढ़ी, बिहार के सीतामढ़ी में कुख्यात संतोष झा की सीजेएम कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान पुलिस के पहरे के बीच करीब तीन बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। अपराधियों द्वारा करीब 20 राउंड फायरिंग किए जाने के दौरान सीजेएम कोर्ट का एक चपरासी भी घायल हो गया।

बताया गया है कि सीजेएम कोर्ट में मंगलवार को पेशी के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संतोष झा को सीतामढ़ी जेल से ही लाया गया था।
पेशी के बाद पुलिस उसको लेकर जा रही थी तो पूर्व से घात लगाए अपराधियों ने संतोष झा पर दनादन फायरिंग शुरू कर दी। गोली उसको सिर में लगी, और वह कोर्ट परिसर में ही गिर गया। उसको इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

संतोष झा को गोली लगने के दौरान अपराधियों ने भागने के क्रम में सीजेएम के एक अनुसेवी संतोष कुमार को भी गोली मार दी। परंतु, गोली अनुसेवी संतोष की बांह में लगी। न्यायालय कर्मी आनन- फानन में संतोष को इलाज के लिए शहर के एक निजी क्लिनिक में लाए, जहां चिकित्सा चल रही है।

इलाज कर रहे चिकित्सक डॉ. वरुण कुमार ने बताया कि कर्मचारी की स्थिति खतरे से बाहर है। उसको आईसीयू में भर्ती कराया गया है। कर्मी संतोष कुमार वैशाली जिले के विदुपुर थाने के खजुवती गांव का निवासी है।

उसने वर्ष 2014 में स्थानीय न्यायालय में अनुसेवी के पद पर अपना योगदान दिया था। इन दिनों संतोष कुमार सीजेएम सरोज कुमारी का अनुसेवी है। गोली लगने की सूचना मिलने के बाद उसकी पत्नी अमृता सिंहा परिजन के साथ पहुंची। इसके इलाज के दौरान देखभाल को लेकर एक नाजिर को प्रतिनियुक्त किया गया है। पत्नी का रो- रोकर बुरा हाल है।

कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान कुख्यात संतोष झा को गोली लगने के बाद अलर्ट पुलिस प्रशासन ने तेजी से उसको अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। उसको अस्पताल में लाए जाने के पहले से ही डॉक्टरों को ओटी में अलर्ट रहने को कह दिया गया था। नगर थाने की पुलिस भी वहां पहुंच गई हुई थी। जैसे ही पुलिस जीप से उसको उतारा गया और ले जाकर बेड पर लेटाया गया, डॉक्टर सुभाष कुमार, केपी देव और प्रमोद कुमार ने देखा। उन डॉक्टरों ने देखने के बाद वहां मौजूद सदर इंस्पेक्टर मुकेश चंद्र कुंवर को मृत हो जाने की बात बताई। इसके बाद पूरे घटनाक्रम की सूचना वरीय पदाधिकारियों को दी गई।

एसपी विकास वर्मन ने खुद पहुंचकर संतोष झा के शव के पास जाकर जांच की। वहां उन्होंने डॉक्टरों से जानना चाहा कि कहां- कहां पर गोली लगी है। इसके बाद पूछताछ कर एसपी चले गए। फिर शव को सुरक्षित रख दिया गया। इसीबीच डीएम डॉ. रणजीत कुमार सिंह भी अस्पताल में पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में जाकर डॉक्टरों से जानकारी ली और वहां किए गए कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बारे में भी जानना चाहा।

अस्पताल परिसर में संतोष झा को लाए जाने के पहले से ही पुलिस की तैनाती बड़ी संख्या में कर दी गई थी। अस्पताल के तीनों बाहरी गेट पर पुलिस तैनात थी और मीडियाकर्मियों, पुलिस पदाधिकारियों के साथ- साथ मरीजों या उनके परिजनों को जांच के बाद ही अंदर प्रवेश करने दिया जा रहा था। पुलिस की तैनाती से पूरा अस्पताल परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था।

संतोष झा के शव का पोस्टमार्टम करने के लिए डॉक्टरों की एक टीम भी बनाई गई है। इसके लिए अनुमंडल के कार्यपालक दंडाधिकारी शिलानाथ सिन्हा को मजिस्ट्रेट बनाया गया है, जबकि सुभाष कुमार, केपी देव और प्रमोद कुमार चिकित्सक के तौर पर शामिल किए गए हैं। शव को पोस्टमार्टम हाउस के पास में ही रखा गया है।

मालूम हो कि वह शिवहर जिले के पुरनहिया थाने के दोस्तियां गांव का रहनेवाला था। वर्ष 2001 उसने मुखिया पर हमले के बाद चर्चा में आया था।
इसके बाद अपराध की दुनिया में पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। इस पर दरभंगा में इंजीनियर हत्याकांड, रीगा के पास पुलिस से मुठभेड़, जिला पार्षद हत्याकांड समेत अन्य कई मामले इसपर चल रहे थे। कुछ में सजा भी हुई थी।

पिछले दिनों इसको सीतामढ़ी जेल में यहां के मुकदमों की सुनवाई को लेकर लाया गया था। कुछ दिनों पूर्व मोतिहारी में भी इसी के गैंग के सदस्य की
कोर्ट परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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