बिहार में ट्रकों से ओवरलोडिंग की चेकिंग के नाम पर वसूली करते आइएएस अधिकारी जितेंद्र कुमार गुप्ता गिरफ्तार

कैमूर , कैमूर जिले के मोहनिया में एसडीएम के पद पर तैनात आइएएस अधिकारी जितेंद्र कुमार गुप्ता को निगरानी की टीम ने घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार की शाम उनके आवास पर देर शाम तक छापेमारी चलती रही। आइएएस अधिकारी जितेंद्र गुप्ता की यह पहली पोस्टिंग थी और उन्हें इसी क्रम में दिसंबर, 2015 में मोहनिया का एसडीएम बनाया गया था। बताया जाता है कि ये अधिकारी नयी दिल्ली के रहनेवाले हैं।

इससे पहले निगरानी की टीम ने उनके ड्राइवर और उसके एक सहयोगी को 80 हजार रुपये घूस लेते हुए भी गिरफ्तार किया। हालांकि, इस मामले की सीधे तौर पर किसी अधिकारी ने पुष्टि नहीं की है।

प्राप्त सूचना के अनुसार, अधिकारी से घूस के रकम की बात तय हुई थी, लेकिन स्पॉट पर पैसे लेने उनका ड्राइवर और उनका एक साथी ही गया था। इसलिए पहले वे गिरफ्त में आये। इसके बाद इनकी निशानदेही पर एसडीएम भी लपेटे में आ गये।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम देर रात तक एसडीएम से पूछताछ करती रही। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय पुलिस ने एसडीएम के आवास की घेराबंदी कर रखी थी। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार की शाम करीब साढ़े पांच बजे विजिलेंस की 15 सदस्यीय टीम डीएसपी विनय कुमार के नेतृत्व में एसडीएम जितेंद्र गुप्ता के आवास पहुंची।

यहां एसडीएम के ड्राइवर संजय पांडेय को घूस लेते गिरफ्तार कर लिया। साथ ही टीम ने ड्राइवर के सहयोगी को भी दबोच लिया। मामला जीटी रोड से गुजरनेवाले ट्रकों से जुड़ा बताया जाता है। एसडीएम के पास ही डीसीएलआर का भी चार्ज है। डीसीएलआर की गाड़ी से बड़ी संख्या में ट्रकों के कागजात भी विजिलेंस की टीम को मिले हैं।

प्राप्त सूचना के अनुसार, यहां से गुजरने वाली ट्रकों से कागजात और ओवरलोडिंग की चेकिंग के नाम पर ये लोग वसूली करते थे। इनका ड्राइवर वसूली के इस काम में मुख्य भूमिका निभाता था। चार-पांच दिन पहले एसडीएम ने लोहा लाद कर टाटा से पंजाब जा रहे चार ट्रकों को ओवरलोडिंग के मामले में पकड़ा। इन ट्रकों का मालिक यमुनानगर हरियाणा का रहनेवाला है।

ट्रकों को छोड़ने के लिए 1.45 लाख रुपये की मांग की गयी थी। काफी मोल-तोल के बाद मामला 90 हजार पर आया। बाद में मामला 80 हजार पर तय हुआ। परंतु इनमें एक ट्रक ड्राइवर सुरेंद्र कुमार से किसी ने निगरानी ब्यूरो में इसकी शिकायत करने की सलाह दी। तब उसने निगरानी में इसकी शिकायत कर दी। निगरानी की टीम ने मामले की पूरी छानबीन करने के बाद इस ट्रैप को अंजाम दिया।

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