बिहार में दूसरे चरण के पांच लोकसभा क्षेत्रों के जदयू के चार प्रत्याशियों समेत 21 पर आपराधिक मामले दर्ज

पटना, बिहार में दूसरे चरण के पांच लोकसभा क्षेत्रों पूर्णिया, बांका, कटिहार, भागलपुर एवं किशनगंज में होने वाले चुनाव में भाग्य आजमा रहे 68 उम्मीदवारों में 31 फीसदी (21) के खिलाफ विभिन्न प्रकारों के आपराधिक मामले दर्ज हैं। सभी 21 प्रत्याशियों ने अपने नामांकन पत्रों में आपराधिक मामलों की घोषणा की है। इनमें निर्दलीय छह, बसपा के तीन, जदयू के चार, जेएमएम के एक, कांग्रेस के तीन, राजद व बसपा के एक-एक प्रत्याशी शामिल हैं। इनमें 14 पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें पांच साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराध या गैर जमानती अपराध के मामले भी शामिल हैं।

बिहार इलेक्शन वॉच व एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की अध्ययन रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार 68 में 34 प्रत्याशी पांचवीं से 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त हैं। जबकि 23 उम्मीदवार स्नातक या उससे अधिक की शिक्षा प्राप्त वाले हैं। एक उम्मीदवार ने अपनी शैक्षणिक योग्यता घोषित नहीं की है और वहीं सात उम्मीदवार सिर्फ साक्षर हैं। वहीं, 45 प्रत्याशियों ने अपनी उम्र 25 से 50 वर्ष के बीच घोषित की है। जबकि 21 प्रत्याशियों ने अपनी उम्र 51 से 80 वर्ष तक घोषित की है। एक प्रत्याशी ने अपनी उम्र 80 वर्ष से अधिक घोषित की है। दूसरे चरण के दो प्रत्याशियों ने अपने पास शून्य संपत्ति घोषित की है। इनमें जेएमएम के किशनगंज से प्रत्याशी सुकल मूर्मू व बांका से निर्दलीय प्रत्याशी संजीव कुमार कुणाल शामिल हैं। वहीं, सबसे कम संपत्ति वाले तीन प्रमुख प्रत्याशियों में सिर्फ चल संपत्ति की घोषणा की है। उनके पास अचल संपत्ति कुछ भी नहीं है। इनमें भारतीय बहुजन कांग्रेस के कटिहार से प्रत्याशी बासुकीनाथ साह के पास महज चार हजार रुपये, पूर्णिया से निर्दलीय प्रत्याशी अख्तर अली के पास 20,524 रुपये और बांका से निर्दलीय प्रत्याशी मनोज कुमार साह के पास महज 41,500 रुपये हैं।

उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों के विश्लेषण के अनुसार 68 में 21 उम्मीदवारों के पास एक करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति है। इनमें जदयू के पांच में चार, कांग्रेस के तीन में सभी तीन, राजद के दो में सभी दो, बसपा के पांच में दो, जेएमएम के तीन में दो, आप के दो में एक एवं 33 निर्दलीय प्रत्याशियों में छह प्रत्याशी करोड़पति हैं।

चुनाव के दौरान पार्टी और प्रत्याशी अनाप-शनाप पैसे खर्च करते हैं, लेकिन चुनाव आयोग को खर्च का ब्योरा सही नहीं दे पाते हैं। कई बार तो पार्टी अलग और प्रत्याशी अलग से खर्च का ब्योरा प्रदर्शित कर देते हैं। इसमें कई बार तालमेल का अभाव होता है।

बिहार इलेक्शन वॉच एवं एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार, 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी से मिले पैसों के खर्च का ब्योरा प्रत्याशियों ने आयोग को नहीं सौंपा। उन्होंने अपने खाते में इसे शून्य दर्शाया। इनमें बांका से निर्वाचित राजद के जयप्रकाश नारायण यादव को पार्टी से पांच लाख आठ हजार 480 रुपये मिले थे, लेकिन उन्होंने अपने खर्च में इसे नहीं दर्शाया। इसी प्रकार राजद के टिकट पर जीते राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को तीन लाख 81 हजार 360 रुपये और तस्लीमुद्दीन को मिले तीन लाख 81 हजार 360 रुपये के खर्च की जानकारी उनके व्यक्तिगत खर्च के ब्योरे में नहीं दी गयी।

कांग्रेस के पूर्णिया से प्रत्याशी पप्पू सिंह सर्वाधिक संपत्ति के मालिक हैं। इनके पास 341 करोड़ 86 लाख रुपये की चल व अचल संपत्ति है तो जेएमएम के बांका से प्रत्याशी राजकिशोर प्रसाद के पास 17 करोड़ 34 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति है। वहीं तीसरे स्थान पर कांग्रेस के कटिहार से प्रत्याशी तारिक अनवर के पास 11 करोड़ 92 लाख से अधिक की चल-अचल संपत्ति है। दूसरे चरण के प्रत्याशियों के पास औसतन 6.51 करोड़ की संपत्ति है। वहीं, 32 प्रत्याशियों ने अपनी देनदारी की भी घोषणा की है। वहीं, 36 उम्मीदवारों ने अपने आयकर विवरण घोषित नहीं किया है, तो 32 प्रत्याशियों ने आयकर का विवरण घोषित किया है।

2014 के लोकसभा चुनाव में लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने पार्टी फंड से मिली राशि तीन लाख रुपये से अधिक 22 लाख रुपये चुनाव खर्च में दिखाया तो चिराग पासवान ने चार लाख 20 हजार रुपये पार्टी से मिलने के बावजूद आठ लाख रुपये दर्शाए। रामचंद्र पासवान को आठ लाख रुपये मिले तो उन्होंने 14 लाख रुपये चुनाव खर्च में बताए। चौधरी महबूब अली कैसर को पार्टी ने कोई राशि नहीं दी, लेकिन उन्होंने पार्टी फंड से मिले दस लाख रुपये तो रामा किशोर सिंह ने 75,650 रुपये की जानकारी दी।

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