बिहार में बीमार बच्चे की रास्ते में मौत होने पर एंबुलेंस चालक ने रास्ते में ही उतारा शव

सुपौल, बिहार के डीएमसीएच रेफर किए गए बीमार बच्चे की रास्ते में मौत होने पर एंबुलेंस चालक ने रास्ते में ही शव और उसके माता-पिता को उतार कर चलता बना।

मानवता को शर्मसार करने वाला यह वाकया सुपौल के किशनपुर में बुधवार को देखने को मिला। सदर थाना क्षेत्र के कर्णपुर निवासी सूर्य नारायण मंडल के पुत्र रोशन कुमार (ढाई साल) मंगलवार की शाम से बुखार और पेट दर्द से पीड़ित था।

पिता उसे इलाज के लिए बुधवार की सुबह सदर अस्पताल ले गए। कुछ देर तक इलाज के बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉ. चंदन कुमार ने उसे डीएमसीएच रेफर कर दिया। पावर ग्रिड की एम्बुलेंस सुबह करीब 11 बजे बच्चे को लेकर डीएमसीएच के लिए निकली पर किशनपुर के पास ही बच्चे की मौत हो गयी।

एम्बुलेंस चालक को परिजन ने वापस घर पहुंचाने को कहा। लेकिन चालक नवीन कुमार और ईएमटी कारी रजक ने शव ले जाने से मना कर दिया और शव सहित परिजन को किशनपुर पीएचसी गेट पर उतार दिया। पिता बच्चे के शव को लेकर रोते बिलखते रहे, मदद मांगते रहे पर किसी ने उनकी मदद नहीं की। रोशन की मां संजू देवी बेहोश हो गयीं। बाद में परिजन स्थानीय लोगों की मदद से ऑटो से बेटे का शव लेकर घर पहुंचे।

ईएमटी कारी रजक ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने उसे बिना आईडी बनाये ही डीएमसीएच भेज दिया। रास्ते में मौत होने पर वे परिजनों को किशनपुर पीएचसी में छोड़कर आये हैं।

सीएस डॉ. घनश्याम झा ने बताया कि रास्ते में मौत होने पर बच्चे को वापस सदर अस्पताल पहुंचाना था। रास्ते में छोड़कर वापस आने की घटना खेदजनक और अमानवीय है। एम्बुलेंस कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी।

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