मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच परिसर में 70 शवों के कंकाल, नरमुंड या हड्डियां बिखरीं पड़ीं हैं

मुजफ्फरपुर, बिहार में मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच परिसर में नरमुंडों की जांच करने गई टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अस्पताल परिसर में 70 शवों के कंकाल, नरमुंड या हड्डियां बिखरीं पड़ीं हैं। जांच बुधवार को पूरी कर ली गई। तीन सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट भी डीएम को सौंप दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन साल में जहां परिसर में करीब 51 शवों का निष्पादन किया गया, वहीं इस साल अबतक 19 शवों को एसकेएमसीएच परिसर में ही जलाया या ठिकाने लगाया गया। जांच रिपोर्ट में एसकेएमसीएच प्रबंधन व पुलिस प्रशासन की लापरवाही भी रेखांकित की गई है। टीम ने अपनी रिपोर्ट के साथ ही इस स्थिति से बचने के लिए कई अनुशंसाएं भी की हैं।

डीडीसी उज्ज्वल कुमार सिंह के नेतृत्व में एसकेएमसीएच में मानव कंकाल मिलने के मामले की जांच करने गई टीम ने रिपोर्ट में बताया है कि एसकेएमसीएच के उक्त स्थल को वर्षों से श्मशान के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि रेलवे व सकरा थाने को छोड़ बाकी सभी थानों से शवों के निष्पादन में लापरवाही बरती जाती है।

कमेटी ने कहा है कि इस स्थिति से बचने के लिए शवों के निष्पादन को मिलने वाली राशि बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए सरकार से अनुरोध किया जा सकता है। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शवों के निष्पादन के लिए मुक्तिधाम कमेटी सहित अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद ली जानी चाहिए, इसके लिए प्रशासनिक पहल की जरूरत है।

चमकी बुखार (एईएस) से बच्चों की मौत को लेकर सीएम नीतीश कुमार व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन आदि पर दर्ज दो अलग-अलग परिवाद सीजेएम सूर्यकांत तिवारी ने एमपी व एलएलए के लिए गठित विशेष कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया। दोनों परिवाद पर विशेष कोर्ट में 10 जुलाई को सुनवाई होगी। एईएस से बच्चों की मौत को लेकर 19 जून को नगर थाना क्षेत्र के सूतापट्टी निवासी मो. नसीम ने सीजेएम कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया था।

चमकी बुखार से बुधवार को केजरीवाल अस्पताल में एक और बच्ची की जान चली गई। वहीं एसकेएमसीएच के पीआईसीयू में अभी सात बच्चे गंभीर हाल में हैं। दूसरी ओर सरैया की एक महिला डेढ़ वर्षीय मृत बच्चे को लेकर आयी। चमकी बुखार से पीड़ित 11 नए मरीज एसकेएमसीएच में भर्ती किये गये। एईएस से अबतक 180 बच्चों की जानें जा चुकी हैं। जबकि 551 मामले सामने आ चुके हैं।

इधर, जिला प्रशासन, एसकेएमसीएच प्रशासन ने दोपहर तक दो एईएस के बच्चे के भर्ती की सूचना सार्वजनिक की है। वहीं केजरीवाल अस्पताल में एक बच्ची की मौत की पुष्टि की गई है।

दिल्ली से आयी शिशु रोग विशेषज्ञों की टीम ने चमकी बुखार से पीड़ित होकर पीआईसीयू भर्ती हुए बच्चों के इलाज के प्रोटोकॉल में बदलाव किया है। जांच व दवा के असर के अनुसार डॉक्टरों की टीम पीआईसीयू में भर्ती होने वाले बच्चों को एईएस की श्रेणी में रख रही है। इसका नेतृत्य राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के सलाहाकर डॉ. एके सिन्हा कर रहे है। हर तीन घंटे पर डॉक्टरों की टीम बच्चों के केस हिस्ट्री लेकर आपस में चर्चा कर रहे हैं। इसके बाद मरीज को एईएस की श्रेणी में रखा जा रहा है। इससे बीमारी के अनुसार बच्चों का इलाज हो रहा है।

चमकी बुखार का लीची से कोई लेना-देना नहीं है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र ने जांच के बाद यह साफ कर दिया। साथ ही कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने इसके उपभोक्ताओं को इससे संबंधित किसी अफवाह पर ध्यान नहीं देने की सलाह दी है।

कृषि मंत्री और प्रधान कृषि सचिव सुधीर कुमार ने बुधवार को लीची अनुसंधान केन्द्र की रिपोर्ट सार्वजनिक की। मंत्री बुधवार को सूचना भवन के संवाद कक्ष में प्रेस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने जांच के बाद साफ कहा है कि लीची में काफी मात्रा में पौष्टिक तत्व हैं। यह चमकी बुखार जैसी बीमारी का कारण नहीं हो सकता है। संस्थान के निदेशक विशाल नाथ ने दूसरे राज्यों की लीची को भी पौष्टिक बताया है।

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