राष्ट्रपति कोविंद ने सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी बिल को दी मंजूरी

नई दिल्ली, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर तबके को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी विशेष प्रावधान को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी अधिसूचना में कहा गया कि संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है।

संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम के जरिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन किया गया है। इसके जरिए एक प्रावधान जोड़ा गया है जो राज्य को नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर किसी तबके की तरक्की के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है। यह विशेष प्रावधान निजी शैक्षणिक संस्थानों सहित शिक्षण संस्थानों, चाहे सरकार द्वारा सहायता प्राप्त हो या न हो, में उनके दाखिले से जुड़ा है। हालांकि यह प्रावधान अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर लागू नहीं होगा।

इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह आरक्षण मौजूदा आरक्षणों के अतिरिक्त होगा और हर श्रेणी में कुल सीटों की अधिकतम 10 फीसदी सीटों पर निर्भर होगा। इससे जुड़ा विधेयक नौ जनवरी को संसद से पारित किया गया था।

बता दें कि मोदी सरकार ने आम चुनाव से ठीक पहले बड़ा फैसला लेते हुए सामान्य वर्ग के लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने का एलान किया है। फैसले के अनुसार सालाना आठ लाख रुपए से कम आय वाले सवर्णों को भी 10 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके लिए कई तरह की शर्तें निर्धारित की गई हैं।

इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को आरक्षण देना है। देश में पहले से 49.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है जिसके तहत एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण मिलता है। हालांकि, लंबे समय से जाट, गुज्जर, राजपूत, मराठा सहित कई जातियों की ओर से आरक्षण की मांग उठती रही है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से 50 फीसदी आरक्षण का दायरा तय किया गया है। सरकार के फैसले से अब सवर्ण वर्ग को भी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।

आरक्षण देने का उद्देश्य काफी पहले से स्पष्ट रहा है, लेकिन समय-समय पर आरक्षण नीति में संशोधन किये गए हैं। आरक्षण का मूल उद्देश्य केंद्र और राज्य में शिक्षा के क्षेत्र, सरकारी नौकरियों, चुनाव और कल्याणकारी योजनाओं में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।

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