सपा 38 व बसपा 38 सीटों पर लड़ेगी – मायावती

लखनऊ, लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व बसपा सुप्रीमो मायावती की हो रही संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कहा कि ये ऐतिहासिक प्रेस कांफ्रेंस भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों गुरू-चेले की नींद उड़ाने वाली है।

मायावती ने भाजपा पर हमलावर होते हुए कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार होने से आज देश का युवा, किसान व महिलाएं सब परेशान हैं। इसलिए 1993 में गेस्ट हाउस कांड को देश व जनहित के लिए पीछे छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा कि सपा-बसपा गठबंधन से देश को बड़ी उम्मीद है। हम कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस के लिए सीट छोड़ने से गठबंधन कमजोर होता है।

मायावती ने कहा कि भाजपा व कांग्रेस की नीतियां एक ही हैं। बोफोर्स के कारण कांग्रेस की सरकार चली गई। इसी तरह राफेल के कारण भाजपा की सरकार भी चली जाएगी।

मायावती ने भाजपा पर हमलावर होते हुए कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार होने से आज देश का युवा, किसान व महिलाएं सब परेशान हैं। इसलिए 1993 में गेस्ट हाउस कांड को देश व जनहित के लिए पीछे छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा कि सपा-बसपा गठबंधन से देश को बड़ी उम्मीद है। हम कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस के लिए सीट छोड़ने से गठबंधन कमजोर होता है।

मायावती ने कहा कि भाजपा व कांग्रेस की नीतियां एक ही हैं। बोफोर्स के कारण कांग्रेस की सरकार चली गई। इसी तरह राफेल के कारण भाजपा की सरकार भी चली जाएगी।

मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए यूपी की 80 सीटों पर गठबंधन फाइनल हो चुका है। सपा 38 व बसपा 38 सीटों पर लड़ेगी। कांग्रेस के लिए अमेठी व रायबरेली की दो सीटें छोड़ दी है। जबकि बाकी सीटें गठबंधन के अन्य सहयोगियों को दी जाएंगी।

इस मौके पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सपा-बसपा गठबंधन स्वीकारने के लिए मीडिया के व यूपी की जनता को धन्यवाद।

अखिलेश ने कहा कि इस समय देश के जो हालात हैं उसे देखते हुए सपा-बसपा ने एक होने का फैसला लिया है। इस समय भाजपा के लोग सत्ता के अहंकार में चूर हैं। उनका मुकाबला करने के लिए हम साथ आए हैं।

अगर मेरी आवाज भाजपा तक पहुंच रही है तो भाजपा के लोग सुन लें कि भाजपा के अत्याचारों के विनाश के लिए सपा व बसपा ने एक होने का निर्णय लिया है। आज से सपा कार्यकर्ता ये समझ लें कि मायावती का अपमान मेरा अपमान है। मैं मायावती जी का पूरा आदर करता हूं। समाजवादी कभी किसी का अपमान नहीं करते।

खास बात यह है कि सपा-बसपा के गठबंधन के एलान के लिए साझा प्रेस कांफ्रेंस उसी जगह हो रही है जहां 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी व अखिलेश यादव ने साझा प्रेस कांफ्रेंस करके गठबंधन की घोषणा की थी। पहले गठबंधन की औपचारिक घोषणा 15 जनवरी को बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव के जन्मदिन के मौके पर होनी थी। पर, उसी दिन कुंभ का पहला और महत्वपूर्ण स्नान है शायद इसीलिए गठबंधन की औपचारिक घोषणा की तारीख बदली गई। इसके पीछे मंशा यह भी है कि गठबंधन की घोषणा को मीडिया में पूरा महत्व और स्थान मिले तथा इसकी चर्चा भी हो सके। उम्मीद है कि कल की घोषणा में यह भी साफ हो जाएगा कि कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा और रालोद को इस गठबंधन में कितनी सीटों की हिस्सेदारी मिलेगी।

लगभग पच्चीस वर्षों बाद सपा और बसपा मिलकर चुनाव लड़ेंगे। जहां तक लोकसभा चुनाव का सवाल है तो पहली बार दोनों पार्टियां परस्पर गठबंधन करके मैदान में उतरने जा रही हैं। इससे पहले 1993 में दोनों पार्टियों ने विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया था। उस समय यह गठबंधन बसपा के तत्कालीन सर्वेसर्वा कांशीराम और सपा के उस समय मुखिया मुलायम सिंह यादव के बीच बातचीत के बाद हुआ था। हालांकि मायावती भी उस समय सक्रिय राजनीति में आ चुकी थीं और कांशीराम के बाद बसपा में महत्वपूर्ण भूमिका में थीं। संयोग यह है कि तब भी भाजपा को रोकने के लिए दोनों दल एक साथ आए थे और इस बार भी गेस्ट हाउस कांड की दुश्मनी भुलाकर भाजपा को रोकने के लिए ही दोनों दल एक साथ आ रहे हैं।

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