दिल्ली-एनसीआर में मौसम ने अचानक ली करवट, तेज आंधी के बाद हुई झमाझम बारिश ने गर्मी से दी राहत

नई दिल्ली,                    दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में शुक्रवार शाम को मौसम के अचानक करवट बदलने से तेज आंधी के बाद हुई झमाझम बारिश ने भीषण गर्मी से परेशान लोगों को थोड़ी राहत दी है। हालांकि मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में 07 जुलाई तक मॉनसून आने की कोई संभावना नहीं है।

दिल्ली में शुक्रवार को बादल छाए रहने और तेज हवाएं चलने से तापमान में कुछ डिग्री की गिरावट दर्ज गई थी।

मौसम विभाग ने राजधानी में शुक्रवार को लू का कहर जारी रहने के साथ ही अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान लगाया था।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा था कि दिन में आंशिक रूप से बादल छाने के साथ ही कुछ स्थानों पर लू चलने का अनुमान है। वहीं, धूल भरी आंधी या गरज के साथ छींटे पड़ने के साथ ही शाम या रात को तेज हवाएं चलने के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

विभाग के अनुसार, शहर में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम 27.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह साढ़े आठ बजे हवा में आर्द्रता का स्तर 25 प्रतिशत रहा।

विभाग ने कहा कि राजधानी दिल्ली में गुरुवार को अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो 2012 के बाद जुलाई में दर्ज किया गया सर्वाधिक तापमान था। न्यूनतम तापमान 31.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश लाने वाले मौसमी तंत्र का अभाव और पाकिस्तान से आने वाली गर्म हवा उत्तर भारत के कई हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों में गुरुवार को असामान्य रूप से ज्यादा तापमान का कारण हो सकती है। देश के सबसे ठंडे स्थानों में से एक लद्दाख के द्रास में तापमान जहां शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तक चला जाता है वहां तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा गुरुवार को जारी बुलेटिन के मुताबिक, उत्तर भारत के कई इलाके लू और भीषण लू जैसे स्थितियों का सामना कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के ऊना में तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से सात डिग्री सेल्सियस ज्यादा है वहीं सोलन में पारा 35.5 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से छह डिग्री ऊपर था। लद्दाख भी लू का सामना कर रहा है। इसमें कहा गया कि द्रास में तापमान 22.6 डिग्री तो नुब्रा के थोइसे में यह 31 डिग्री सेल्सियस रहा। बुलेटिन के मुताबिक स्ताकना में तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस,लेह में 25.7 डिग्री सेल्सियस, कारगिल में 28.5 डिग्री सेल्सियस और आधार शिविर में 23.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में आम तौर पर मॉनसून पूर्व के दिनों में लू या भीषण लू जैसी स्थितियां देखी जाती हैं। कई बार पहाड़ी इलाकों में भी ऐसी स्थितियां देखने को मिलती हैं।

आमतौर पर ठंडे रहने वाले हिमालयी इलाकों में सामान्य से ज्यादा तापमान के बारे में पूछे जाने पर आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय मोहपात्रा ने कहा कि इन इलाकों के लिये लू का सामना करना असामान्य बात नहीं है। उन्होंने कहा, हालांकि इन इलाकों में दर्ज तापमान सामान्य नहीं हैं।

मोहपात्रा ने कहा कि इस क्षेत्र में मानसून पहले ही कमजोर है। इसने तापमान को सामान्य से ऊपर पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर, लद्दाख, असम और अरुणाचल प्रदेश में जून-जुलाई में अधिकतम तापमान दर्ज किया जाता है।

लू पर काम कर रहे आईएमडी के वैज्ञानिक नरेश कुमार ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान सामान्य से ऊपर जाने की संभावित वजह पाकिस्तान से आने वाली गर्म हवाएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर हवाएं ऊपरी स्तर पर पांच से छह किलोमीटर पर बह रही हों तब पहाड़ी क्षेत्रों में मौजूदा लू जैसे हालात की एक वजह यह हो सकती है। कुमार ने कहा कि यह हवा मैदानी इलाकों में तापमान बढ़ने की वजह है। आईएमडी ने बृहस्पतिवार को अगले दो दिनों के लिये लू की चेतावनी जारी की थी।

मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पालावत ने कहा कि लद्दाख में कम बारिश हुई और वहां फिलहाल कोई मौसमी तंत्र सक्रिय नहीं है जिससे उत्तर भारत में नमी आए।

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