महाराष्ट्र में विधानपरिषद की दस सीटों के चुनाव में भाजपा ने जीती पांच सीटें

मुंबई,                        महाराष्ट्र में विधानपरिषद की दस सीटों के लिए चुनाव में भाजपा के सभी पांच उम्मीदवार जीत गए। कांग्रेस के दूसरे प्रत्याशी अशोक भाई जगताप की हार से सत्तारूढ़ महाविकास अघाड़ी को 10 दिन के अंदर ही दूसरी बार करारा झटका लगा है। इससे पहले 10 जून को राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा अपने तीनों उम्मीदवार जिताने में कामयाब रही थी और शिवसेना के दूसरे उम्मीदवार को मुंह की खानी पड़ी थी।

10 सीटों के लिए हुए विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने अपनी क्षमता से एक अधिक उम्मीदवार खड़े किए थे। सोमवार को हुए मतदान में उसके पांचों उम्मीदवार प्रवीण दरेकर, राम शिंदे, उमा खापरे, श्रीकांत भारतीय और प्रसाद लाड विजयी रहे।

शिवसेना भी अपने दोनों उम्मीदवारों सचिन अहीर एवं आमशा पाडवी को तथा राकांपा अपने दोनों उम्मीदवारों एकनाथ खडसे और रामराजे निंबालकर को जिताने में कामयाब रही। लेकिन कांग्रेस के पहली प्राथमिकता के उम्मीदवार चंद्रकांत हंडोरे ही जीत सके।

दूसरी प्राथमिकता के उम्मीदवार मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक भाई जगताप को भाजपा के पांचवीं प्राथमिकता के उम्मीदवार प्रसाद लाड के सामने हार का मुंह देखना पड़ा। इस प्रकार महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस एक बार फिर अपना दबदबा एवं रणनीतिक कौशल दिखाने में कामयाब रहे हैं।

संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस प्रत्याशी को जीत के लिए सिर्फ 12 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता थी, जबकि भाजपा को 22 अतिरिक्त मत चाहिए था। देवेंद्र फड़नवीस एक बार फिर कुछ छोटे दलों एवं निर्दलीय विधायकों को जोड़कर यह संख्या जुटाने में सफल रहे। महाविकास अघाड़ी सत्ता में होने के बावजूद यह करिश्मा करने में विफल रही।

राज्यसभा चुनाव की भांति विधान परिषद चुनाव में भी मतगणना शुरू होने में देरी हुई। सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से भाजपा के पक्ष में मत डालने आए दो बीमार विधायकों लक्ष्मण जगताप एवं मुक्ता तिलक के वोट डालने के तरीके पर आपत्ति उठाई गई। राज्य चुनाव आयोग ने यह आपत्ति खारिज की, तो सत्तारूढ़ पक्ष केंद्रीय चुनाव आयोग के पास गया। वहां से भी आपत्ति खारिज होने के बाद मतगणना शुरू हो सकी।

महाराष्ट्र विधापरिषद के चुनाव के लिए वोटिंग आज शाम चार बजे तक चली थी। इसमें महाराष्ट्र विधानसभा के विधायकों ने वोट डाले थे। मतगणना प्रक्रिया शुरू होने के बाद एक बार फिर बाधा उत्पन्न हुई, जब भाजपा की ओर से राकांपा के पक्ष में पड़े एक वोट पर आपत्ति जताई गई। इस पर विवाद के दौरान ही भाजपा के भी एक मत पर आपत्ति आ गई। इन दोनों मतों को अवैध घोषित किए जाने के बाद जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा 25.73 निर्धारित हुआ। 285 विधायकों के मतदान के बाद यह कोटा 26 का था। शिवसेना के एक विधायक की मृत्यु एवं राकांपा के दो विधायकों नवाब मलिक एवं अनिल देशमुख के जेल में होने कारण 288 सदस्यों वाली विधानसभा में 285 विधायक ही वोट डाल सके।

बता दें कि इस चुनाव में पांच भाजपा उम्मीदवारों का जीत जाना पार्टी के लिए काफी बड़ी बात है। विधानपरिषद की कुल दस सीटों के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से पांच उम्मीदवार भाजपा के और छह महाविकास अघाड़ी गठबंधन के थे। लेकिन पर्याप्त संख्याबल न होने के बावजूद भाजपा की यह जीत अप्रत्याशित है। वहीं महाविकास अघाड़ी के लिए यह बेहद करारी हार मानी जा रही है। बता दें कि चुनाव से पहले ही महाविकास अघाड़ी गठबंधन का समीकरण बिगड़ा हुआ था। यहां तक कि सहयोगी दलों द्वारा एक दूसरे को अपने सरप्लस वोट ट्रांसफर करने पर भी सहमति नहीं थी। तब शिवसेना द्वारा कहा गया था कि सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए खुद से वोट जुटाएंगे। कहा तो यह भी गया था कि इसकी बुनियाद राज्यसभा चुनाव में मिली हार के बाद पड़ चुकी थी, जब शिवसेना को उम्मीदवार को वहां मुंह की खानी पड़ी थी। शिवसेना को इस बात की आशंका है कि कांग्रेस ने उसे अपना वोट ट्रांसफर नहीं किया था।

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