राजग ने द्रौपदी मुर्मू को बनाया राष्ट्रपति उम्मीदवार

नई दिल्ली,                          आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया है। मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में हुई भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। काफी देर तक चले मंथन में पीएम मोदी, अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं ने बैठक की थी। जिसमें सर्वसम्मति से द्रौपदी मुर्मू का नाम फाइनल किया गया। इससे पहले उम्मीदवार तय करने के लिए भाजपा संसदीय दल की बैठक हुई जिसमें कई नामों पर गहन विचार विमर्श हुआ। बैठक के दौरान करीब 20 नामों पर चर्चा हुई। जिसमें तय हुआ कि इस बार पूर्वी भारत से और किसी आदिवासी महिला को मौका दिया जाए।

राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू के नाम की घोषणा करते हुए भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने कहा कि पहली बार किसी महिला आदिवासी प्रत्याशी को वरीयता दी गई है। उन्होंने कहा कि हम आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए द्रौपदी मुर्मू को एनडीए के उम्मीदवार के रूप में घोषित करते हैं। नड्डा ने बताया कि हमने विपक्ष के साथ आम सहमति बनाने की कोशिश की लेकिन बात न बनने पर मंगलवार की बैठक में हमने अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया। निर्वाचित होने पर, 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू भारत की राष्ट्रपति बनने वाली पहली आदिवासी महिला होंगी।

पीएम मोदी ने एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के बारे ट्वीट किया। पीएम ने लिखा, “द्रौपदी मुर्मू जी ने अपना जीवन समाज की सेवा और गरीबों, दलितों के साथ-साथ हाशिए के लोगों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित किया। उनके पास समृद्ध प्रशासनिक अनुभव है और उनका कार्यकाल उत्कृष्ट रहा है। मुझे विश्वास है कि वह हमारे देश की एक महान राष्ट्रपति होंगी।”

पीएम मोदी ने आगे लिखा, “लाखों लोग, विशेष रूप से वे जिन्होंने गरीबी का अनुभव किया है और कठिनाइयों का सामना किया है, द्रौपदी मुर्मू जी के जीवन से बहुत ताकत मिलती है। नीतिगत मामलों में उनकी समझ और दयालु स्वभाव से हमारे देश को बहुत लाभ होगा।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया, “आज देश के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व व जेपी नड्डा जी की अध्यक्षता में एनडीए ने राष्ट्रपति पद के लिए श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी की घोषणा की है। ये निर्णय जनजातीय गौरव को नए शिखर पर ले जाने का काम करेगा। इसके लिए मोदी जी का अभिनंदन करता हूं।”

द्रौपदी मुर्मू को एनडीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ट्वीट कर कहा, “द्रौपदी मुर्मू का एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में होना ओडिशा के लिए गर्व का क्षण है। जब पीएम मोदी ने मेरे साथ इस पर चर्चा की थी तो मुझे खुशी हुई। वह देश में महिला सशक्तिकरण के लिए एक चमकदार उदाहरण स्थापित करेंगी।”

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने सबके समर्थन की उम्मीद जताई है। रायरंगपुर स्थित अपने आवास पर लोगों से बातचीत में उन्होंने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि सबका सहयोग मिलेगा, इसकी पूरी उम्मीद है। राष्ट्रपति पद के लिए नाम की घोषणा के संबंध में कहा कि आश्चर्य के साथ-साथ खुशी भी हुई। उन्होंने कहा कि ओड़िशा का होने के नाते वह बीजू जनता दल से भी समर्थन का आग्रह करेंगी। आशा जताई कि ओड़िशा के सभी सांसद और विधायक मेरा समर्थन करेंगे। मैं राज्य से दो बार विधायक और बीजू जनता दल-भाजपा की सरकार में मंत्री रह चुकी हूं।

द्रौपदी मुर्मू के नाम के ऐलान के साथ ही भाजपा के लिए राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट जुटाना भी आसान हो जाएगा। राष्ट्रपति चुनाव में कुल मतों का मूल्य 10,79,206 है। ऐसे में अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए एनडीए को इसके आधे से अधिक यानी 5 लाख 40 हजार मूल्य के वोट चाहिए। फिलहाल एनडीए के कुल वोटों का मूल्य 4,97,715 है। ऐसे में उसके पास 43 हजार मूल्य के वोटों की ही कमी है।

बीजेडी के एनडीए के साथ आने पर उसके मौजूद 31,686 वोटों का मूल्य भी एनडीए को मिलेगा। वहीं आदिवासी उम्मीदवार के नाम पर भाजपा को कुछ अन्य दलों का भी साथ मिल सकता है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि बतौर राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के लिए जीत आसान होगी।

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू है। वह एक आदिवासी जातीय समूह संथाल परिवार से ताल्लुक रखती हैं। ओडिशा के आदिवासी परिवार में जन्मीं द्रौपदी मुर्मू झारखंड की नौवीं राज्यपाल बनी थीं। राजनीतिज्ञ होने के अलावा वह अनुसूचित जनजाति समुदाय से आती हैं। राज्यपाल बनने से पहले वह भारतीय जनता पार्टी की सदस्य रही हैं। यही नहीं द्रौपदी मुर्मू साल 2000 में गठन के बाद से पांच साल का कार्यकाल (2015-2021) पूरा करने वाली झारखंड की पहली राज्यपाल हैं।

उड़ीसा में भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल गठबंधन सरकार के दौरान, वह 6 मार्च, 2000 से 6 अगस्त, 2002 तक वाणिज्य एवं परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहीं। इसके अलावा 6 अगस्त, 2002 से 16 मई 2004 तक मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री थीं।

मुर्मू ने एक शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी और फिर ओडिशा की राजनीति में प्रवेश किया। वह मयूरभंज (2000 और 2009) के रायरंगपुर से भाजपा के टिकट पर दो बार विधायक रहीं। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में पार्टी के भीतर कई प्रमुख पदों पर कार्य किया है। मुर्मू 2013 से 2015 तक भगवा पार्टी की एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भी थीं। उन्होंने 1997 में एक पार्षद के रूप में चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। उसी वर्ष, उन्हें भाजपा के एसटी मोर्चा का राज्य उपाध्यक्ष चुना गया।

द्रौपदी मुर्मू को अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है। भाजपा आदिवासियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है क्योंकि गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने हैं। इन राज्यों में आदिवासियों का अच्छी खासी संख्या है। इसलिए आदिवासी मतदाता पार्टी की योजना के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ ही, 64 वर्षीय द्रौपदी महिला मतदाताओं को आकर्षित करने में भी पार्टी की मदद कर सकती हैं।

झारखंड की राज्यपाल के रूप में द्रौपदी मुर्मू हमेशा यहां के आदिवासियों तथा छात्राओं के हितों के लिए सजग और तत्पर रहीं। इसे लेकर कई बार उन्होंने राजभवन में विभिन्न विभाग के पदाधिकारियों को बुलाकर आवश्यक निर्देश दिए।राज्यपाल के रूप में द्रौपदी मुर्मू ने अपनी ही सरकार द्वारा विधानसभा से पारित कराई गई सीएनटी-एसपीटी में संशोधन से संबंधित विधेयक लौटाया। इतना ही नहीं, उन्होंने वर्तमान सरकार में जनजातीय परामर्शदातृ समिति (टीएसी) के गठन संबंधित फाइल लौटाई। हालांकि राज्य सरकार ने बाद में इसमें संशोधन कर उसमें राजभवन की भूमिका ही खत्म कर दी। वर्तमान राज्यपाल ने भी विधि परामर्श लेने के बाद टीएसी के गठन को गलत ठहराया है।

द्रौपदी मुर्मू शाकाहारी हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने पूरे राजभवन में मांसाहार पर प्रतिबंध लगाया था। राजभवन परिसर में रहनेवाले पदाधिकारियों व कर्मियों के आवासों में भी मांस-मछली का बनना प्रतिबंधित था। कुलाधिपति के रूप में भी द्रौपदी मुर्मू ने उच्च शिक्षा के विकास में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। इसमें चांसलर पोर्टल शुरू करना भी इनकी बड़ी उपलब्धि थी, जिसमें सभी विश्वविद्यालयों को एक प्लेटफार्म पर लाकर एक साथ नामांकन से लेकर, निबंधन और परीक्षा के फार्म भरने की प्रक्रिया शुरू की गई। इनके कार्यकाल में विश्वविद्यालयों में गुणी व अनुभवी कुलपतियों और अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति हुई।

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल के रूप में उन्होंने जमशेदपुर में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर प्रयास किए, जिसके बाद जमशेदपुर महिला कालेज को विश्वविद्यालय के रूप में अपग्रेड किया गया। द्रौपदी मुर्मू पहली राज्यपाल थीं, जिन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में जाकर वहां पढ़ाई कर रहीं छात्राओं की समस्याओं को जानने का प्रयास किया। साथ ही उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।

आजादी के बाद देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद के लिए पहली बार किसी आदिवासी को आगे कर राजग ने एक तीर से कई निशाना साधा है। देशभर में आदिवासियों की आबादी 12 करोड़ से अधिक है और सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर इनकी भागीदारी अन्य समुदायों की अपेक्षा कम है। ऐसे में राजग ने द्रौपदी मुर्मू का नाम आगे बढ़ाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि उसके एजेंडे में समरस और सर्वस्पर्शी समाज की परिकल्पना सर्वोपरि है। उसका समाज के हर तबके के उन्नयन में विश्वास है।

इसका राजनीतिक प्रभाव भी व्यापक तौर पर पड़ेगा। वैसे दल जिनका आधार भाजपा विरोध की राजनीति रही है, वे इसे लेकर राजग के साथ आ सकते हैं। इसकी चर्चा झारखंड से ही करते हैं। द्रौपदी मुर्मू का नाम राज्यपाल के लिए पहली बार आश्चर्यजनक तौर पर आया था। दिसंबर, 2014 में विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद भाजपा ने सरकार बनाई तो पहली बार गैर आदिवासी मुख्यमंत्री का प्रयोग किया गया। रघुवर दास पद पर काबिज हुए। इसकी भरपाई के लिए राज्यपाल के पद पर द्रौपदी मुर्मू की नियुक्ति की गई।

संताल आदिवासी समुदाय से आने वाली मुर्मू ने अपने कार्यकाल में तब विपक्ष की राजनीति करने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी प्रभावित किया। राष्ट्रपति चुनाव में इसका असर पड़ सकता है। झारखंड में सत्ता पर काबिज झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायकों की संख्या 30 है। मोर्चा के पास लोकसभा में एक और राज्यसभा में एक सदस्य हैं। मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन और द्रौपदी मुर्मू के बीच बेहतर रिश्ते हैं।

हेमंत सोरेन अगर राजग के साथ जाएंगे तो कांग्रेस असहज होगी। विपक्ष का साथ देने पर हेमंत सोरेन को भविष्य में राजनीतिक नुकसान का डर सताएगा। झारखंड विधानसभा के 81 में से 28 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित है। इसमें से फिलहाल 26 सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस का कब्जा है।

झारखंड से सटे ओड़िशा में बीजू जनता दल का शासन है। द्रौपदी मुर्मू के नाम पर ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक आसानी से उनके समर्थन के लिए आगे आ सकते हैं। ओड़िशा में 28 विधानसभा सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं। गुजरात के आगामी विधानसभा चुनाव में भी यह प्रभावी कदम साबित होगा। गुजरात में दो दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों पर आदिवासियों का झुकाव चुनाव में जीत-हार तय करता है। पश्चिम बंगाल में आदिवासी समुदाय की आबादी झारखंड से सटे जिलों में सर्वाधिक है। इसके अलावा उत्तर बंगाल में इनकी काफी तादाद है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने यशवंत सिन्हा का नाम आगे किया है। ऐसे में भाजपा को भविष्य में उनकी राजनीतिक घेराबंदी में मदद मिलेगी। ममता बनर्जी बांग्ला मानुष पर जोर देती हैं, लेकिन बंगाल के बाहर से एक राजनीतिक व्यक्ति को आगे करने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ सकता है।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी दलों की ओर से संयुक्त उम्मीदवार के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा, माकपा-भाकपा और राकांपा से लेकर द्रमुक समेत विपक्षी खेमे की लगभग सभी पार्टियों ने मंगलवार को हुई अपनी बैठक में पूर्व भाजपा नेता सिन्हा को आम सहमति से विपक्ष का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने का फैसला किया। विपक्षी दलों ने यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने का एलान करने के बाद भाजपा से उनका समर्थन करने की अपील कर अपना सियासी दांव भी चला। लेकिन मौजूदा राजनीतिक हकीकत से साफ है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आमने-सामने की चुनावी टक्कर होगी और वोटों के समीकरण के हिसाब से राजग का पलड़ा स्पष्ट रूप से भारी है।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए सर्वानुमति बनाने की गंभीर पहल नहीं करने के लिए सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जयराम ने कहा कि हम भाजपा और सरकार के सहयोगियों से राष्ट्रपति के रूप में यशवंत सिन्हा का समर्थन करने की अपील करते हैं ताकि देश एक योग्य राष्ट्रपति को निर्विरोध चुन सके।

विपक्षी खेमे के अनुसार सिन्हा 27 जून को सुबह 11.30 बजे राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उनके चुनाव प्रचार का संचालन करने के लिए प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं की एक समिति का गठन किया जाएगा।

मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। विपक्षी उम्मीदवार के रूप में सिन्हा के नाम की घोषणा के बाद अगले राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए 18 जुलाई को मतदान होना अब तय माना जा रहा है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया जारी है। 29 जून नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है।

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