पंजाब में संगरूर सीट पर आप की हार पार्टी के लिए बड़ा झटका, शिरोमणि अकाली दल मान के सिमरनजीत सिंह जीते

संगरूर,               वर्ष 2014 और 2019 में लगातार दो संसदीय चुनावों में बड़ी जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी सूबे की सत्ता में आने के तीन माह बाद अपने ही गढ़ में हार गई। तीन माह पहले 92 सीटों पर अप्रत्याशित जीत दर्ज कर सबको चौका देने वाली आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी गुरमेल सिंह को शिरोमणि अकाली दल मान के सिमरनजीत सिंह मान के हाथों 5,822 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। मान को 2,53,154 मत मिले जबकि सिंह को 2,47,332 मत मिले। पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने नतीजों के संकेत मिलते ही हार स्वीकार कर शिअद (अमृतसर) नेता को बधाई दे दी थी।

मान 23 वर्ष के बाद तीसरी बार सांसद बने हैं। वह 1999 में भी संगरूर सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अपनी पुलिस सर्विस में आपरेशन ब्लू स्टार से आहत होकर आइपीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे सिमरनजीत सिंह मान को राजनीति ने कई उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले। 1945 को एक राजनीतिक घरानों में जन्में सिमरनजीत सिंह मान को पहली बार 1989 में तरनतारन की जनता ने संसद तक उस समय पहुंचाया था, जब वह जेल में बंद थे। करीब 5 लाख वोट के अंतर से उन्होंने एकतरफा जीत हासिल की थी। उसके बाद संगरूर की जनता ने 1999 में अकाली व कांग्रेसी दिग्गजों को पिछड़कर मान को संसद की सीढ़ियां चढ़ाई।हालांकि संसद में भी कृपाण साहिब को साथ लेकर जाने को लेकर मान हमेशा विवादों में रहे हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने असूलों से समझौता नहीं किया। अगर सिमरनजीत सिंह मान के राजनीतिक करियर की बात करें तो 1999 के बाद उन्हें हमेशा जनता ने नकारा ही है, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में सिमरनजीत सिंह मान के हक में उतरे दीप सिद्धू समेत अन्य कलाकारों ने मान के हक में जमकर प्रचार किया था व चुनावों के दौरान दीप सिद्धू की मौत ने मान के हक में एक लहर भी चलाई थी।

उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल जोगिंदर सिंह मान 1967 विधानसभा स्पीकर भी रहे। यहीं से उन्हें राजनीतिक गुड़ती मिली थी। शिरोमणि अकाली दल (अ) के प्रधान सिमरजीत सिंह मान ने 1989 में लोकसभा हलका तरनतारन से जीत दर्ज की थी।1999 से लोकसभा हलका संगरूर से विजेता रहे। 23 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद सिमरनजीत सिंह मान को संगरूर लोकसभा सीट पर दोबारा जीत मिली है।

सिमरनजीत सिंह मान ने 1966 में आइपीएस की परीक्षा पास की व 1967 में बतौर आइपीएस पुलिस फोर्स ज्वाइन की। पंजाब के फिरोजपुर, फरीदकोट समेत अन्य जिलों में एसएसपी के तौर पर तैनात रहे। डिप्टी डायरेक्टर विजीलेंस चंडीगढ़ तैनात रहे।बताया जाता है कि बतौर आइपीएस अधिकारी अपनी सेवा के दौरान मान ने पाकिस्तान के ड्रग स्मग्लर का ट्रैक ब्रेक किया। 7400 के करीब नशा तस्करों को पकड़ा था। नशे के खिलाफ सिमरनजीत सिंह मान हमेशा से सख्त रहे हैं। अपनी पुलिस सर्विसिस व इसके बाद राजनीतिक प्लेटफार्म पर भी वह नशे के मुद्दे पर हमेशा सत्ताधारी पार्टियों पर कटाक्ष करते रहे हैं।

सिमरनजीत सिंह मान ने 18 जून 1984 को अपने पद से इस्तीफा दिया था। 6 जून को आपरेशन ब्लू स्टार से वह बेहद आहत हो चुके थे। श्री हरमंंदिर साहिब पर हुई कार्रवाई ने सिमरनजीत सिंह मान को आहत कर दिया था, जिस कारण उन्होंने आपरेशन ब्लू स्टार के कुछ दिन के बाद ही इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के बाद उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया था, जिसके बाद उन्हें कई राज्यों की जेलों में भी रखा गया था। वर्ष 1989 में जेल में ही वह सांसद का चुनाव जीत गए थे। पुलिस ने विभिन्न मामलों में करीब 30 बार उन्हें गिरफ्तार किया था।

गांव सतौज से मुख्यमंत्री तक का सफर तय करने वाले भगवंत मान के गढ़ में आम आदमी पार्टी की ‘राजधानी’ कही जाने वाली संगरूर सीट पर आप की हार पार्टी के लिए बड़ा झटका है।

प्रचार दौरान भगवंत मान ने कई बार विरोधियों पर अपने जुगनू वाले अंदाज में कटाक्ष भी करने की कोशिश की थी, हालांकि जनता ने इस बार मुख्यमंत्री मान की बातों को सिरे से नकार दिया।

उपचुनाव में मतगणना की शुरुआत में शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के उम्मीदवार सिमरनजीत सिंह मान और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी गुरमेल सिंह के बीच कांटे की टक्कर रही। गुरमेल सिंह दो बार आगे जरूर दिखे, लेकिन सिमरनजीत सिंह मान ने पहले से लेकर अंत तक बढ़त बनाए रखी।

दो बार संगरूर हलके से शानदार जीत दर्ज करने वाली आम आदमी पार्टी को आज अपनी ‘राजधानी’ सीट पाने के लिए कड़ी जद्दोजहद करनी पड़ी और आखिरकार शिकस्त का सामना किया।

आम आदमी पार्टी की सरकार जहां लोगों के भरोसे को ही अपना गरूर मानती थी, उसी सरकार ने आज 3 महीने के कार्यकाल दौरान ही लोगों का भरोसा खो दिया। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान करीब 3 महीने तक अपने विधानसभा हलका धूरी से लगातार गैरहाजिर रहे, जिस कारण केवल विधानसभा हलका धूरी ही नहीं, बल्कि जिले भर के लोगों में भारी निराशा का माहौल रहा। यहां तक की धूरी में विधायक के गुमशुदगी के पोस्टर तक लगा दिए गए थे, जिसके बाद लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए भगवंत मान ने केवल धूरी में रोड शो ही निकाला।

सत्ता में आते ही संगरूर की विधायक नरेंद्र कौर भराज ने इंटरनेट मीडिया पर लाइव होकर साफ कह दिया था कि अब समय बदल गया है, लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए मेरे पास आने की जरूरत नहीं है। भराज के उक्त ब्यान ने संगरूर में जनता का रूख ही बदल दिया। जनता आप नेताओं के ऐसे रवैये से नाराज दिखाई देने लगी। इसका जवाब उन्होंने संसदीय चुनाव में दिया है।

कांग्रेस के दलवीर गोल्डी 79,668 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे तो भाजपा के केवल ढिल्लों 66,298 वोटों के साथ चौथे नंबर पर। भाजपा हार के बावजूद इस बात को लेकर खुश है कि एक तो आप सरकार के प्रत्याशी की हार हुई। दूसरा यह पहला मौका रहा जब भाजपा के झंडे-बैनर संगरूर के गांव-गांव में लगे और हरेक बूथ पर भाजपा का स्टाल लगा।

शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में रहते हुए भाजपा संगरूर में कभी चुनाव नहीं लड़ी थी। वहीं, कांग्रेस के आनंद का राज्य यह है कि सिमरनजीत सिंह मान ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का दुर्ग ध्वस्त कर दिया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने जहां सिमरनजीत सिंह मान को बधाई दी है। वहीं, उन्होंने कहा है कि चुनाव परिणाम आप सरकार से लोगों की नाराजगी दर्शाती है।

कांग्रेस के लिए राहत की बात यह भी है कि उपचुनाव में हार के बाद सरकार का ध्यान कानून व्यवस्था को सुधारने की तरफ जाएगा, क्योंकि अभी तक आप सरकार ने जिस प्रकार से कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों व विधायकों पर शिकंजा कसा हुआ है। इससे भी कांग्रेस के अंदर खासी बेचैनी देखी जा रही थी।

आप सरकार ने जहां कांग्रेस के पूर्व मंत्री साधू सिंह धर्मसोत और संगत सिंह गिलजियां के खिलाफ पर्चा दर्ज किया है। वहीं, भोआ से पूर्व विधायक जोगिंदर पाल को भी गिरफ्तार किया हुआ है, जबकि सरकार कांग्रेस के प्रदेश प्रधान व विधायक अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, भारत भूषण आशु पर भी पर्चा दर्ज करने की तैयारी में है।

मीडिया को संबोधित करते हुए आप प्रवक्ता मलविंदर सिंह कांग ने कहा कि संगरूर लोकसभा उपचुनाव का नतीजा आ गया है। उन्होंने कहा कि हम संगरूर सीट के लोगों के जनादेश का सम्मान करते हैं। हम सिमरनजीत सिंह मान को उनकी जीत पर बधाई देते हैं।

वहीं, भाजपा के प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा ने सिमरनजीत सिंह मान को बधाई देते हुए कहा, पंजाब ने ताबड़तोड़ हत्याओं, ध्वस्त कानून व्यवस्था पर अपना फैसला दिया। भगवंत मान अपनी लोक सभा सीट पर ही आप पार्टी को जीत नहीं दिला पाए।

संगरूर लोकसभा उपचुनाव के लिए मतों की गिनती रविवार को सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा में शुरू हुई। यहां 23 जून को हुए मतदान में 16 प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर थी।

संगरूर लोकसभा उपचुनाव में केवल 45.30 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया जबकि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 72.44 प्रतिशत और वर्ष 2014 के आम चुनाव में 76.71 प्रतिशत मतदान हुआ था। संगरूर में कुल 15.69 लाख मतदाता हैं। मौजूदा समय में राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 2014 और 2019 में संगरूर सीट से जीत दर्ज की थी।

पंजाब विधानसभा के लिए इस साल के शुरू में हुए चुनाव में भगवंत मान विधायक चुने गए थे जिसके बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए इस सीट पर उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया था।

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