आजम खां का किला भाजपा के घनश्याम सिंह लोधी ने किया ध्वस्त

सपा के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खां का किला भाजपा प्रत्याशी घनश्याम सिंह लोधी ने ध्वस्त कर दिया। भाजपा प्रत्याशी घनश्याम सिंह लोधी ने आजम खां के करीबी सपा प्रत्याशी आसिम राजा को 42192 मतों से करारी शिकस्त दी। कुल 33 राउंड में हुई मतगणना का कार्य करीब तीन बजे संपन्न हो गया। घनश्याम लोधी को कुल 367397 वोट मिले जबकि, आसिम राजा ने 325205 मत प्राप्त किए। चुनाव जीतने के बाद घनश्याम लोधी ने विकास का वादा किया तो आसिम राजा ने आरोप लगाया कि उनके साथ खेल हो गया, उन्हें हराया गया है।

इस उपचुनाव में बीजेपी और सपा के अलावा कोई भी उम्मीदवार 5 हजार का आंकड़ा नहीं छू पाया। यहां तक कि सपा के बाद अगर सबसे ज्यादा EVM का कोई बटन दबा, तो वो नोटा का था। करीब साढ़े 4 हजार लोगों ने नोटा को चुना। इसके अलावा संयुक्त समाजवादी दल के हरिप्रकाश आर्य को 4,130 वोट मिले। बतां दें कि इस उपचुनाव में बसपा ने रामपुर की सीट से अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था।

रामपुर की ये सीट इसी साल हुए यूपी विधानसभा चुनावों के बाद खाली हुई थी। आज़म खान ने रामपुर की ही विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीतने के बाद राज्य की राजनीति को चुना। 23 जून को देश की अलग अलग सीटों के साथ यहां भी उपचुनाव के लिए वोटिंग हुई थी और नतीजों में आज बीजेपी ने परचम लहरा दिया।

उप चुनाव का परिणाम आते ही भाजपा में जश्न है तो सपाइयों का चेहरा लटक गया है। पूर्व एमएलसी घनश्याम सिंह लोधी ने बताया कि उन्होंने अपने राजनेतिक सफर की शुरुआत 2004 में भाजपा से ही की थी। बाद में कल्याण सिंह से नजदीकियां होने पर वह राष्ट्रीय क्रांति पार्टी में चले गए। वर्ष 1999 और 2009 में वह बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़े। वर्ष 2016 में वह सपा से एमएलसी रहे। वह कुल दो बार एमएलसी रहे।

चंद दिन पहले तक जो घनश्याम लोधी, आज़म खान के सबसे सगों में शुमार थे। आज वही रामपुर में आज़म की किरकरी का सबब बन गए हैं। सालों तक सपा से सियासत करने वाले घनश्याम लोधी ने इस साल की शुरुआत में साइकिल से उतरकर बीजेपी का दामन थाम लिया और आज रामपुर के सांसद बन गए। 2022 के इस चुनाव में जिन घनश्याम लोधी के खिलाफ आज़म खान ने प्रचार किया। उन्हीं लोधी को एक समय में आज़म का राइट हैंड कहा जाने लगा था। बात साल 2016 के यूपी विधान परिषद चुनाव की है। लोधी MLC बनने के दावेदारों में से थे। आज़म की बैकिंग भी थी, लेकिन पार्टी ने लोधी का टिकट काट किसी और दे दिया। आज़म को ये बात पता चली, तो आसमान सिर पर उठा लिया। आज़म ने पहले तो उस उम्मीदवार का टिकट कटवाया और उसके बाद हेलिकॉप्टर से पार्टी का सिंबल लखनऊ से रामपुर मंगवाया। फिर घनश्याम लोधी को दोबारा विधान परिषद भिजवाया।

हालांकि, कुछ समय बाद आज़म खान और घनश्याम लोधी के बीच नज़दीकियां दूरी में तब्दील होने लगीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कहा जाता है कि साल 2019 में रामपुर शहर की सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव के दौरान घनश्याम लोधी के घर पर बीजेपी नेताओं की बैठक हुई थी, तब भी ये कयास लगाए जा रहे थे कि वो बीजेपी में शामिल हो जाएंगे, लेकिन तब घनश्याम बीजेपी में नहीं गए।

रामपुर को आज़म खान का गढ़ माना जाता है। आज़म यहीं के रहने वाले हैं और राजनीतिक तौर पर पूरे क्षेत्र में आज़म का अच्छा रसूख माना जाता रहा है। 2019 में आज़म खान खुद इस सीट से चुनकर लोकसभा पहुंचे थे। 2004 और 2009 लोकसभा चुनाव में जया प्रदा सपा के टिकट पर ही इस सीट पर जीतीं। हालांकि 2014 की मोदी लहर में रामपुर में बीजेपी ने जीत हासिल की थी। इसके अलावा बात अगर रामपुर विधानसभा सीट की करें, तो पिछले 42 साल में सिर्फ एक बार ये सीट आज़म खान के हाथ से फिसली। 1980 से लेकर अबतक हुए विधानसभा चुनावों में 1996 के चुनाव के अलावा रामपुर की विधानसभा सीट आजम के घर में ही सुरक्षित रही। ये आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि रामपुर समाजवादी पार्टी और खासकर आज़म खान के लिए कितना खास रहा है।

रामपुर लोकसभा सीट पर गुरुवार को चुनाव हुआ। मतदान को लेकर रामपुर में कोई दिलचस्पी नहीं दिखी। शहर का मतदान केंद्र हो या फिर ग्रामीण इलाके। हर जगह से लगभग एक जैसी तस्वीर नजर आ रही थी। लोगों में उप चुनाव को लेकर कोई दिलचस्पी न होने के पीछे कई वजह हो सकती हैं। फिलहाल जब वोटिंग फीसदी के सभी आंकड़ों को अंतिम रूप दिया गया तो यह तस्वीर साफ हुई कि जिले में 17 लाख वोटरों में से महज सात लाख लोगों ने ही वोटों का इस्तेमाल किया। यानि दस लाख से ज्यादा वोटरों ने अपने वोट का इस्तेमाल ही नहीं किया।

विधानसभा क्षेत्र कुल वोटर कुल वोट पड़े वोटिंग फीसदी
स्वार 307135 129873 42.29
चमरौवा 308314 136397 44.24
बिलासपुर 344730 159012 46.13
रामपुर 388994 122323 31.45
मिलक 357417 158835 44.44
कुल 1706590 706440 41.71

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