एकनाथ शिंदे आज शाम 7:30 बजे लेंगे महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ

मुंबई,                    महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे होंगे। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह चौंकाने वाला ऐलान किया है। माना जा रहा था कि एकनाथ शिंदे को उप मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिलेगी और फडणवीस मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन इस ऐलान ने पूरी तस्वीर ही पलट दी है। देवेंद्र फडणवीस ने शिंदे के साथ राज्यपाल से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे के पास शिवसेना के ज्यादातर विधायकों का समर्थन है और भाजपा एवं 16 अन्य निर्दलीय विधायकों ने उन्हें समर्थन का फैसला लिया है। फडणवीस ने कहा कि एकनाथ शिंदे आज शाम को 7:30 बजे ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके बाद आने वाले समय में कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा। यही नहीं उन्होंने कहा कि मैं कैबिनेट से ही बाहर रहूंगा और सरकार को पूरा सहयोग दूंगा।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि 2019 के चुनाव के बाद हमें बहुमत मिला था। लेकिन शिवसेना ने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से समझौता कर कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। बालासाहेब ठाकरे इन दोनों ही दलों के खिलाफ पूरी जिंदगी रहे। फिर भी उद्धव ठाकरे ने उनसे ही समझौता किया और महा विकास अघाड़ी का गठन हुआ। उस सरकार में जो प्रचंड भ्रष्टाचार हुआ और पहली बार महाराष्ट्र के इतिहास में दो मंत्री जेल में गए।

उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने दाऊद का विरोध किया था और इनकी सरकार के एक मंत्री के ही उससे रिश्ते थे। यह सावरकार का अपमान है और हिंदुत्व का अपमान है। औरंगाबाद को सत्ता में रहने के आखिरी दिन संभाजी नगर किया गया। वह भी तब जबकि गवर्नर ने फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था। यह फैसले आने वाली सरकार को फिर से लेने होंगे क्योंकि जो उन्होंने किया, उसे मान्यता ही नहीं मिलेगी।

इस दौरान देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे का नाम लेते हुए कहा कि उनके पास शिवसेना के ज्यादातर विधायकों का समर्थन है। इसकी वजह यह है कि वही असली शिवसेना हैं और दुख की बात है कि उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के विधायकों को छोड़कर एनसीपी और कांग्रेस को महत्व दिया।

एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जा रही है उसका निर्वहन करूंगा। विकास का जो काम  रुक गया था उसे आगे बढ़ाया जाएगा। महाराष्ट्र के विकास के लिए हम साथ आए हैं। पिछले कुछ दिनों में हमने अपना पक्ष समझाने की कोशिश की। हमें सरकार में काम करने में दिक्कत आ रही थी जिसके बारे में हमने उद्धव ठाकरे को बताया था। इस गठबंधन के बाद विधायकों को सही नहीं लग रहा था। मैं शहरी विकास मंत्रालय में काम कर रहा था। भाजपा के साथ हमारा प्राकृतिक गठबंधन था। बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व के विचार को लेकर हम जब बढ़े तो सरकार की तरफ से समर्थन नहीं मिला। जब विधायक कोई बात कह रहे थे उसे समझने की जरूरत थी। इतने बड़े पैमाने पर 50 लोग साथ आए। मैं खुद मंत्री था मुझे किसी बात की कमी नहीं थी लेकिन जब लोगों ने मुझे अपनी चिंता बताई तो मजबूरी में मुझे यह फैसला करना पड़ा।

एकनाथ शिंदे ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस ने बहुत बड़ा फैसला किया है। भाजपा के 106 विधायक हैं बावजूद इसके उन्होंने मुझे मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया है। उन्होंने अपना दिल बड़ा कर खुद मुख्यमंत्री का पद नहीं लिया. शिवसेना को मौका दिया इसके लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूंःयह सरकार लोगों की उम्मीदों को पूरा करने का काम करेगी। मैं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का शुक्रगुजार हूं। शिवसेना के 40 विधायक और निर्दलीय मिलाकर 50 विधायक आज साथ हैं।

देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की है। दोनों नेताओं ने इस मुलाकात में राज्य में सरकार गठन का दावा पेश किया। भाजपा के पास कुल 106 विधायक हैं, जबकि एकनाथ शिंदे ने भी शिवसेना के बागियों और निर्दलीय विधायकों समेत कुल 49 सदस्यों के समर्थन का दावा किया है।

आज ही एकनाथ शिंदे गोवा से मुंबई पहुंचे थे और फिर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के घर पर पहुंचे थे। फिर दोनों एक साथ ही राज्यपाल से मिलने के लिए निकले। एकनाथ शिंदे गोवा से अकेले ही आए हैं, जबकि अन्य बागी विधायक अब भी वहां के ताज होटल में ठहरे हुए हैं।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक भाजपा खेमे से कुल 28 मंत्री हो सकते हैं, जिनमें आशीष शेलार, सुधीर मुनगंटीवार और चंद्रकांत पाटिल समेत कई सीनियर नेता हो सकते हैं। इसके अलावा 13 मंत्री पद एकनाथ शिंदे कैंप को मिल सकते हैं। इनमें 8 कैबिनेट मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा 5 लोगों को राज्य मंत्री के पद दिए जा सकते हैं। दरअसल 2 जुलाई से हैदराबाद में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने वाली है।

वेंद्र फडणवीस के का यह गेमप्लान ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे’ की कहावत पर आधारित है। भाजपा ने यह दांव चलकर उद्धव ठाकरे से 2019 के ‘धोखे’ का बदला ले लिया है, जब साथ मिलकर चुनाव लड़ने के बाद शिवसेना ने पलटी मारते हुए कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। अजित पवार को तोड़कर फडणवीस ने सीएम पद की शपथ ली लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाने की वजह से उन्हें 24 घंटे में ही कुर्सी से उतरना पड़ा। फडणवीस ठाकरे का तख्तापलट करके वह बदला पूरा कर लिया है। लेकिन इस तख्तापलट के बाद फडणवीस को सीएम ना बनाकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सत्ता के लालच में उद्धव की सरकार नहीं गिराई गई है।

शिंदे के साथ शिवसेना के 39 विधायकों की बगावत के बाद से उद्धव ठाकरे का खेमा लगातार इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा को विलेन के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था। भाजपा को सत्ता के लालच में बगावत कराने और विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाना शुरू कर दिया था। भाजपा ने एक झटके में इस नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि फडणवीस ने लंबी छलांग लेने के लिए कुछ कदम पीछे लिए हैं। वह इस कदम से जनता को यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि उसने शिवसेना की सरकार गिराई नहीं है, बल्कि कथित तौर पर हिंदुत्व के अजेंडे से हट चुके उद्धव गुट को हटाकर बालासाहेब ठाकरे के नक्शेकदम पर आगे बढ़ने वाली शिवसेना को सत्ता में आने में मदद की है। माना जा रहा है कि अगले चुनाव में भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है।

महाराष्ट्र में उपजे राजनीतिक संकट के केंद्र में रहने वाले शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने कभी पार्टी कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी और वह अपने संगठनात्मक कौशल तथा जनसमर्थन के बल पर शिवसेना के शीर्ष नेताओं में शुमार हो गए।
कभी मुंबई से सटे ठाणे शहर में ऑटो चालक के रूप में काम करने वाले 58 वर्षीय शिंदे ने राजनीति में कदम रखने के बाद बेहद कम समय में ठाणे-पालघर क्षेत्र में शिवसेना के प्रमुख नेता के तौर पर अपनी पहचान बनायी। उन्हें जनता से जुड़े मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने के लिए पहचाना जाता है।

9 फरवरी 1964 को महाराष्ट्र के सतारा में जन्में एकनाथ शिंदे शिवसेना में बगावत के बाद अब वे भाजपा के समर्थन से सरकार बना रहे हैं। एकनाथ संभाजी शिंदे उद्धव सरकार में पीडब्ल्यूडी कैबिनेट मंत्री थे। वे कोपरी-पचपाखड़ी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। शिंदे 2004, 2009, 2014 और 2019 के लिए महाराष्ट्र विधानसभा में लगातार 4 बार निर्वाचित हुए हैं। कम उम्र में ही वे ठाणे आ गए और 11वीं तक की शिक्षा मंगला हाई स्कूल और जूनियर कॉलेज से पूरी की। उन्हें शिक्षा छोड़नी पड़ी, और अपने परिवार को सपोर्ट करने के लिए काम करना शुरू कर दिया।

1980 में, वह शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे से प्रभावित थे और एक शिवसैनिक के रूप में काम करते हुए पार्टी में शामिल हो गए। उस समय के दौरान, उन्होंने कई आंदोलनों में भाग लिया। उन्होंने बेलगौवी की स्थिति को लेकर महाराष्ट्र-कर्नाटक आंदोलन में भाग लिया था जिसके बाद उन्हें 40 दिनों के लिए जेल में डाल दिया गया था।

कभी एकनाथ शिंदे मुंबई से सटे ठाणे शहर में ऑटो-रिक्शा चलाते थे। वे अपने परिवार को सपोर्ट करने के लिए रिक्शा चलाते थे। 58 वर्षीय शिंदे राजनीति में शामिल होने के बाद ठाणे-पालघर क्षेत्र में एक प्रमुख शिवसेना नेता के रूप में उभरे और जनहित के मुद्दों के प्रति आक्रामक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

शिवसेना ने उन्हें 1997 में, एक पार्षद के रूप में ठाणे नगर निगम (टीएमसी) का चुनाव लड़ने का अवसर दिया, जिसमें उन्होंने भारी बहुमत से जीत हासिल की। 2001 में, वह ठाणे नगर निगम में सदन के नेता के रूप में चुने गए। वह 2004 तक इस पद पर बने रहे। ठाणे नगर निगम में सदन के नेता के रूप में, उन्होंने खुद को ठाणे नगर निगम या शहर से संबंधित मुद्दों तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि समग्र विकास और पूरे जिले के कल्याण में सक्रिय रुचि ली। 2004 में, शिंदे को बालासाहेब ठाकरे द्वारा ठाणे विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया गया था, और उन्होंने इसे भारी बहुमत से जीता था। अगले ही वर्ष, 2005 में, उन्हें शिवसेना ठाणे जिला प्रमुख के प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त किया गया।

वह 2009, 2014 और 2019 के बाद के विधानसभा चुनावों में भी विजयी हुए। 2014 के चुनावों के बाद, उन्हें शिवसेना के विधायक दल के नेता और बाद में महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया। एक महीने के भीतर, जैसा कि शिवसेना ने राज्य सरकार में शामिल होने का फैसला किया, उन्होंने लोक निर्माण विभाग (सार्वजनिक उपक्रम) मंत्री के रूप में शपथ ली और जनवरी 2019 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाली। एकनाथ शिंदे की शादी लता शिंदे से हुई है। उनके बेटे, डॉ श्रीकांत शिंदे, एक आर्थोपेडिक सर्जन हैं। वे कल्याण निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं।

बता देें कि राज्यपाल की ओर से फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया गया था, जिसे शिवसेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के आदेश पर रोक लगाने से ही इनकार कर दिया। यह उद्धव ठाकरे और शिवसेना के लिए करारा झटका था। शायद इसी के चलते सीएम उद्धव ठाकरे ने फेसबुक लाइव पर संबोधित करते हुए इस्तीफा दे दिया था। यही नहीं अपने भावुक भाषण में उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता भी छोड़ने का ऐलान कर दिया था।

You May Also Like

error: ज्यादा चालाक मर्तबान ये बाबू कॉपी न होइए