एनजीटी ने नोएडा प्राधिकरण और दिल्ली जल बोर्ड पर लगाया 150 करोड़ जुर्माना

नई दिल्ली,                नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कई आदेशों के बावजूद सीवेज का दूषित पानी बहाकर यमुना नदी को प्रदूषित किए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए नोएडा प्राधिकरण और दिल्ली जल बोर्ड पर 150 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है। एनजीटी ने तय मानक के अनुसार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) काम नहीं करने और दूषित पानी नोएडा/कोंडली ड्रेन के जरिए यमुना नदी में बहाने के लिए यह जुर्माना लगाया है।

एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस ए.के. गोयल की अगुवाई वाली बेंच ने नोएडा प्राधिकरण को जुर्माने के 100 करोड़ रुपये और दिल्ली जल बोर्ड को 50 करोड़ रुपये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के खातों में जमा करने का आदेश दिया है। इस रकम का इस्तेमाल पर्यावरण और जन स्वास्थ्य को हुए नुकसान की भरपाई पर खर्च किया जाएगा।

बेंच ने सीपीसीबी की ओर से पेश रिपोर्ट पर विचार करते हुए यह आदेश दिया है। एनजीटी ने अपने फैसले में कहा है कि तथ्यों से साफ है कि जहां नोएडा की बहुमंजिला इमारतों में न तो पर्याप्त संख्या में एसटीपी हैं और ना ही तय मानक के अनुसार वो काम कर रहे हैं। साथ ही कहा कि दिल्ली जल बोर्ड द्वारा संचालित एसटीपी भी तय मानक से काम नहीं कर रहे हैं।

एनजीटी ने कहा कि इसकी वजह से नोएडा और शहादरा ड्रेन के जरिए यमुना के साथ-साथ गंगा नदी भी प्रदूषित होती है। एनजीटी ने 2018 में अभिष्ट कुसुम गुप्ता की ओर से दाखिल याचिका पर यह फैसला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली नगर निगम, जल बोर्ड और नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही के चलते कोंडली/नोएडा ड्रेन के जरिए यमुना को प्रदूषित किया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि बिना शोधन के ही नाले में सीवेज का पानी बहाया जा रहा है।

एनजीटी ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्य सचिव को  इस मामले को गंभीरता से लेने और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, इन दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई करने को भी कहा है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सीपीसीबी, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के अध्यक्ष को एक जॉइंट कमेटी बाने का निर्देश दिया है। साथ ही पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए सुधारात्मक कदम उठाने का आदेश दिया है। इसके लिए तीन माह का वक्त दिया गया है।

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि रिपोर्ट से साफ है कि नोएडा की 95 बहुमंजिला हाउसिंग सोसाइटियों में से सिर्फ 76 में एसटीपी हैं और इनमें से भी अधिकांश तय मानकों के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा उद्योगों से भी दूषित जल निकल रहा है। इसी तरह दिल्ली जल बोर्ड द्वारा संचालित एसटीपी भी तय मानक के अनुसार काम नहीं कर रहा है।

 

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