जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने पार्टी से दिया इस्तीफा

पटना,            जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। शनिवार को नालंदा में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए आरसीपी सिंह ने कहा’ मेरे खिलाफ ये सभी आरोप कुछ लोगों द्वारा एक साजिश के तहत लगाए गए हैं, जो मेरी बढ़ती लोकप्रियता से डरते थे।’ उन्होंने कहा कि मैं तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं। जद (यू) में अब क्या बचा है? जद (यू) डूबता जहाज है। जद (यू) का झोला लेकर मैं क्या करूंगा? इसके साथ ही आरसीपी सिंह ने नई पार्टी बनाने का भी संकेत दिया है।

आरसीपी सिंह ने कहा कि पार्टी में कुछ लोग मेरे खिलाफ साजिश करने में लगे हुए थे। पिछले कुछ वक्त से मैं सब कुछ देख रहा था। फिर मैंने काफी सोंच विचार करके फैसला लिया है। फिलहाल मैं मीडिया के माध्यम से इस्तीफा देने की घोषणा करता हूं। इसके तुरंत बाद में पार्टी को पत्र भी भेज दूंगा। पार्टी में कोई कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो रहा है। पिछला कार्यक्रम मैंने 4 वर्ष पहले किया था। पार्टी में कार्यकर्ता का बूरा हाल करके रखा गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने मुझे बिना सोचे समझे नोटिस भेज दिया। अगर इस बारे में जानकारी चाहिए थी तो मुझ से व्यक्तिगत रुप से पूछा जा सकता था।

आरसीपी सिंह ने कहा कि पार्टी के नेता अब केवल गणेश परिक्रमा करते हैं। उन्होंने कहा कि 2019 के चुनाव में हमने एनडीए गठबंधन को शानदार सफलता दिलाई। 40 में 39 सीटों पर विजय प्राप्त की, फिर 2020 में क्या हुआ सबको पता है। 2020 में पार्टी की क्या गत हो गई। पार्टी में संगठन नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। पार्टी के कार्यकर्ता, जिला अध्यक्ष और नेता अब केवल गणेश परिक्रमा कर रहे हैं।

आरसीपी सिंह ने कहा कि राज्यसभा से मेरा नाम काटे जाने से पहले उन्होंने मुझसे बात तक नहीं की, कोई औपचारिकता तक नहीं निभाई गयी। बार-बार ये कहा जा रहा है कि राज्यसभा में आरसीपी सिंह दो टर्म रह चुके हैं। ऐसे मैं पूछना चाहता हूं कि क्या ये नियम पार्टी के अन्य लोगों पर भी लागू होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वो खुद कितने टर्म से सीएम रह रहे हैं।

आरसीपी सिंह इस बयान के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। पिछले महीने जुलाई में तेलंगाना में हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान जब आरसीपी सिंह पहुंचे तो उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगने लगी। हालांकि बीजेपी ने इस बारे में बयान जारी कर कहा था कि आरसीपी सिंह एक सरकारी कार्यक्रम में भाग लेने तेलंगाना पहुंचे थे।

गौरतलब है कि आरसीपी सिंह के खिलाफ पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर विरोध की आवाज लगातार उठ रही थी। पिछले साल जेडीयू अध्यक्ष रहते हुए आरसीपी सिंह से पार्टी उम्मीद कर रही थी कि वो केंद्रीय नेतृत्व से पार्टी के लिए अधिक सीटों को लेकर बात करेंगे लेकिन आरसीपी सिंह ने उस वक्त केंद्रीय मंत्रिमंडल में खुद के लिए एक बर्थ स्वीकार कर लिया। आरसीपी सिंह के इस फैसले से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नाराज थे।

आरसीपी सिंह के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद जेडीयू नेता और मंत्री अशोक चौधरी ने कहा था कि मैने आरसीपी सिंह का बयान सुना। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया लेकिन नीतीश कुमार का नाम तक नहीं लिया। इससे साबित होता है कि उन्होंने पार्टी की सहमति के बिना मंत्री पद स्वीकार किया है। दूसरी बार नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को बीजेपी से बात कर उत्तर प्रदेश में पार्टी के लिए सीट अर्जित करने का काम सौंपा लेकिन वो उसमें भी नाकाम रहे। इससे पार्टी के भीतर उनके खिलाफ आवाज और तेज हो गई।

इस बीच आरसीपी सिंह के भी तेवर बढ़ते गए। पार्टी से राज्यसभा टिकट ना मिलने के बाद उन्होंने अपनी ही पार्टी के उस बयान पर कटाक्ष किया था जिसमें पार्टी ने कहा था कि नीतीश कुमार पीएम मैटेरियल हैं। आरसीपी सिंह ने पार्टी की इस टिप्पणी पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि 17 सांसदों के साथ कोई पीएम बनने के सपने कैसे देख सकता है?

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जेडीयू ने आरसीपी सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। आसीपी सिंह पर साल 2013 से 2022 के बीच अकूत संपत्ति बनाने का आरोप है। जेडीयू ने आसीपी सिंह को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि 9 सालों में आपको परिवार के नाम पर 58 प्लॉट की रजिस्ट्री हुई है। इस तरह कुल 800 कट्ठा जमीन की खरीद हुई है। नोटिस में आरसीपी सिंह से पूछा गया है कि इतनी संपत्ति उन्होंने कैसे अर्जित की? जानकारी के मुताबिक खरीददारों में आरसीपी सिंह की आईपीएस बेटी लिपि सिंह का भी नाम है।

जेडीयू के नोटिस के मुताबिक आरसीपी सिंह पर आरोप है कि आरसीपी सिंह ने नालंदा जिले के दो प्रखंड अस्थावां और इस्लामपुर में ही 40 बीघा जमीन खरीदी है। माना जा रहा है कि आरसीपी सिंह ने बिहार के दूसरे जिलों में भी संपत्ति है। जानकारी के मुताबिक आरसीपी सिंह की ज्यादातर जमीन पत्नी गिरजा सिंह और दोनों बेटियां लिपि सिंह और लता सिंह के नाम पर है।

ये भी आरोप है कि साल 2016 के हलफनामे में आरसीपी सिंह ने इन संपत्तियों का ब्यौरा नहीं दिया जबकि इनकी रजिस्ट्री 2013 से 2016 के बीच हुई है। नोटिस के मुताबिक अस्थावां के शेरपुर मालती मौजा में आरसीपी सिंह के परिवार के नाम पर 33 प्लॉट की रजिस्ट्री हुई है। इन 33 प्लॉटों में से 4 प्लॉट लिपि सिंह के नाम पर और 18 प्लॉट लता सिंह के नाम पर खरीदे गए हैं जबकि 12 प्लॉट की रजिस्ट्री उनकी पत्नी गिरिजा देवी के नाम पर है।

आरसीपी सिंह की संपत्ति का ब्यौरे को नोटिस के साथ भेजते हुए जेडीयू ने उनसे 5 सवाल पूछे हैं।

पहला सवाल- क्या नालंदा के दो प्रखंडों में आपने 2013 से अबतक 40 बीघा जमीन खरीदी है?

दूसरा सवाल- क्या आपने वाजिब आमदनी के जरिए ये संपत्ति खरीदी हैं? क्योंकि पार्टी आपकी इस खरीद को अनियमित्ताओं के दायरे में मानती है।

तीसरा सवाल- ज्यादातर जमीन आपकी पत्नी और दोनों बेटियों के नाम पर है। आपने 2016 के हलफनामें में इसका जिक्र क्यों नहीं किया?

चौथा सवाल- इनमें कुछ ऐसी संपत्ति भी है जो किसी ने किसी को दान दी थी और दान देने वाले ने बाद में वो जमीन आपको बेच दी।

पांचवा सवाल- किसी एक ने दूसरे से जमीन खरीदी और फिर कुछ दिनों बाद वही जमीन आपकी बेटियों को क्यों बेच दी?

जदयू का कहना है कि आरसीपी सिंह ने पार्टी में रहते हुए करोड़ों रुपये की बेहिसाब संपत्ति अपने और अपने परिवार नाम कर दी। बिहार जदयू के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने आरसीपी सिंह को कारण बताओ नोटिस भेजकर अकूत संपत्तियों और अनियमितताओं पर जवाब मांगा है। जदयू के इस नोटिस बिहार में राजनीतिक घमासान मच गया है।

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे आरसीपी सिंह के लंबे समय से पार्टी आलाकमान से संबंध खराब चल रहे हैं। इसी वजह से उन्हें राज्यसभा का टिकट नहीं मिला और फिर केंद्रीय मंत्री का पद गंवाना पड़ा था। फिलहाल आरसीपी सिंह के पास पार्टी और सरकार में कोई पद नहीं है। अब जेडीयू नेतृत्व ने ही उनपर गंभीर आरोप लगाए हैं।

प्रदेशाध्यक्ष द्वारा आरसीपी सिंह को लिखे गए पद में कहा गया है कि नालंदा जिले के दो जेडीयू नेताओं ने सबूतों के साथ उनके खिलाफ शिकायत की है। इसमें कहा गया कि आरसीपी सिंह ने उनके और उनके परिवार के नाम पर साल 2013 से 2022 के बीच अकूत अचल संपत्ति निबंधित कराई। इसमें कई तरह की अनियमितताएं नजर आ रही हैं।

उमेश सिंह कुशवाहा ने आरसीपी से कहा कि आपने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अधिकारी और राजनेता के रूप में काम किया। दो बार आपको राज्यसभा भेजा गया। जेडीयू का राष्ट्रीय महासचिव और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। केंद्र में मंत्री के रूप में काम करने का भी मौका मिला। इस दौरान सीएम नीतीश ने आपका भरपूर साथ दिया। मुख्यमंत्री जीरो टॉलरेंस नीति पर काम करते हैं और इतने बड़े नेता होने के बावजूद उनपर कोई दाग नहीं लगा और न ही कोई संपत्ति बनाई।

जेडीयू ने अकूत संपत्ति के मामले में आरसीपी सिंह से जवाब मांगा है। प्रदेशाध्यक्ष उमेश सिंह ने कहा कि वे जल्द से जल्द उनके और उनके परिवार से जुड़ी संपत्ति के मामले में अपनी राय स्पष्ट करें।

साल संपत्ति खरीददार
2011 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-67, प्लॉट- 4698, 4562 लता सिंह, लिपि सिंह, पिता- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2011 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-178, प्लॉट- 3787 लता सिंह, लिपि सिंह, पिता- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2013 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-4, प्लॉट- 4483 लता सिंह, लिपि सिंह, पिता- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2013 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-115, प्लॉट- 5847 लता सिंह, लिपि सिंह, पिता- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2014 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-372, प्लॉट- 4149 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2014 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-115, प्लॉट- 3751 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2014 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-270, प्लॉट- 4158 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2014 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-270, प्लॉट- 3706 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2014 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-270, प्लॉट- 3681 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2015 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-379, प्लॉट- 3711 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2015 मौजा- महमदपुर, खाता-68, प्लॉट- 3264 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2015 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-304, प्लॉट- 3738 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2015 मौजा- शेरपुर मालती, खाता-235, प्लॉट- 3695 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2015 मौजा- शेरपुर मालती, खाता- 426, प्लॉट- 4417 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2015 मौजा- शेरपुर मालती, खाता- 418, प्लॉट- 4528 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2017 मौजा- शेरपुर मालती, खाता- 67, प्लॉट- 3745 गिरजा सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2018 मौजा- शेरपुर मालती, खाता- 249, प्लॉट- 5877 (बिक्री करने वाले का नाम -बनारस प्रसाद) लता सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2018 मौजा- शेरपुर मालती, खाता- 86, प्लॉट- 3757 लता सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2018 मौजा- शेरपुर मालती, खाता- 249, प्लॉट- 5877 (बिक्री करने वाले का नाम अलग- दारो देवी) लता सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह
2019 मौजा- शेरपुर मालती, खाता- 3, 219…प्लॉट- 4461, 4091 लता सिंह, पति- रामचंद्र प्रसाद सिंह

जदयू ने अपनी इस लिस्ट में 2015 तक आरसीपी सिंह पर पत्नी का नाम गिरजा सिंह और उसके बाद 2018 से पत्नी का नाम लता सिंह बताकर हेरफेर का आरोप भी लगाया है। यही नहीं, इन संपत्तियों की फेहरिस्त इस साल यानि 2022 तक जाती है।

ने इन्हीं संपत्तियों की लिस्ट देकर आरोप लगाया है कि आरसीपी ने अपने चुनावी हलफनामे में भी इनका जिक्र नहीं किया। अब सवाल उठ रहे हैं कि आगे क्या? सियासी गलियारे में चल रही सुगबुगाहट को माने तो चर्चा है कि आरसीपी सिंह आईएएस रह चुके हैं। ऐसे में वो भी अपने तरकश से दस्तावेजों का तीर निकाल सकते हैं।

‘अधिकारी कितना भी गलती करता रह जाए, कितने भी गंभीर मामलों से जुड़ा हो लेकिन कोई उसका बाल बांका नहीं कर सकता क्योंकि उसने RCP टैक्स देने का काम किया है।’ 2018 में तेजस्वी यादव ने एक टीवी इंटरव्यू में आरसीपी सिंह की हैसियत को कुछ इस तरह बयां किया था। मतलब बिहार में अगर कुछ ‘बड़ा’ करना है तो बिना आरसीपी सिंह का पत्ता भी नहीं खड़क सकता। सरकार से लेकर पार्टी तक में रामचंद्र प्रसाद सिंह (आरसीपी सिंह) का सिक्का चलता था। अफसर से लेकर उद्योगपति तक आरसीपी सिंह को नजरअंदाज नहीं कर सकते थे।

जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने शनिवार को कहा कि प्रथम दृष्टया यह भ्रष्टाचार का मामला लग रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि आरसीपी सिंह का पक्ष आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नोटिस के जरिए जानने की कोशिश की गई है कि जो ब्योरा पार्टी को प्राप्त हुई है, आपका (RCP सिंह) का क्या कहना है। इसलिए पार्टी की ओर से उन्हें नोटिस दिया गया है। उन्होंने जो भी जमीन खरीदी है उसका एफिडेविट में जिक्र नहीं है तो यह चुनाव आयोग का मामला बनता है। यह मामला चुनाव आयोग को देखना चाहिए। यह सबको मालूम होना चाहिए कि हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और हमारी सरकारी भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलती है। इस संबंध में सरकार से संबंधित किसी व्यक्ति पर अगर इस तरह का आरोप लगता है तो स्वभाविक रूप से यह गंभीर है। जल्द से जल्द उन्हें (RCP सिंह) पूरे मसले पर अपनी बात रखनी चाहिए।

कुशवाहा ने आगे कहा कि अभी जो भी उनपर आरोप है कि कहां से संपत्ति आई, कैसे आई यह सब जांच का विषय है। लेकिन इतना सबको मालूम है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ऐसी चीजों को कतई बर्दाश्त नहीं करते हैं। स्वभाविक रूप से अगर किसी ने साथ रहकर भी ऐसा किया है तो इसमें दो बातें हो सकती है। या तो नीतीश कुमार की जानकारी के बिना ऐसा किया गया होगा या फिर उनसे दूर हटने के बाद ऐसा किया गया होगा। लेकिन पूरी बात जांच के बाद ही पता चल पाएगी। अगर पार्टी के किसी सदस्य के बारे में कोई सूचना आती है तो पार्टी की जिम्मेदारी बनती है जिनके बारे में सूचना है उन्हें इस बात से अवगत कराया जाए। प्रथम दृष्टया यह मामला भ्रष्टाचार जैसा दिखता ही है। अंतिम निष्कर्ष पर अभी पहुंचना संभव नहीं है, जब तक उनका पक्ष सामने ना आ जाए। हम लोग उनकी बात आने का इंतजार करेंगे।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि पार्टी का दायित्व है कि सामने वाले को मौका दिया जाए। अगर जवाब से संतुष्ट नहीं होंगे तो अगला कदम उठाया जाएगा। आवश्यकता अनुसार किसी भी जांच एजेंसी से मामले की जांच कराई जा सकती है।

आरसीपी सिंह के समर्थकों की ओर से ‘बिहार का सीएम कैसा हो, आरसीपी सिंह जैसा हो’ जैसी नारेबाजी पर कुशवाहा ने कहा कि जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसपर अपनी बात स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर रहकर अगर कोई ऐसी नारेबाजी करता है तो सरासर गलत है। पार्टी ऐसी चीजों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि आरोप लगाने से काम नहीं चलेगा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पूरे मामले की जांच करवाकर तथ्य जनता के सामने रखना चाहिए।लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि एक बात स्पष्ट है कि जेडीयू आज की तारीख में दो गुटों में बंटी हुई पार्टी है। एक गुट बीजेपी का समर्थन करता है और दूसरा किसी भी कीमत में बीजेपी का भला नहीं चाहता है। यही आरसीपी सिंह केंद्र सरकार में जेडीयू का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। सीएम नीतीश कुमार को यह भूलना नहीं चाहिए कि आरसीपी सिंह उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। सवाल उठता है कि तथाकथित रूप से जिस मुख्यमंत्री के बारे में कहा जाता था कि वह भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति रखते हैं क्या वह आरसीपी सिंह के कारनामे को टॉलरेंट कर रहे थे। क्या नीतीश कुमार अपनी पार्टी के केंद्र में बने मंत्री का भ्रष्टाचार टॉलरेंट कर रहे थे।

चिराग ने कहा कि हकीकत यह है कि आज के डेट में जब आरसीपी सिंह की नजदीकी बीजेपी से होती है, तो जेडीयू की ओर से उनपर भ्रष्टाचार का आरोप डाल दिया जाता है। आरोप क्यों लगा रहे हैं, जांच कीजिए आपकी सरकार है तो तथ्य सामने दीजिए।

तेजस्वी यादव तो विधानसभा में आरसीपी टैक्स का नाम लेकर नीतीश सरकार को घेर चुके हैं। उन्होंने एकबार सदन में कहा था कि बिहार में आरसीपी टैक्स लिया जाता है। भारत की कर प्रणाली में इस तरह के किसी टैक्स का कोई प्रावधान नहीं है लेकिन ये विशेष किस्म का टैक्स सिर्फ बिहार में लिया जाता है। नीतीश सरकार के कामकाज पर हमला करने के लिए अक्सर तेजस्वी आरसीपी टैक्स का नाम लेते हैं। एक बार उन्होंने कहा था कि बिहार में बस आरसीपी टैक्स सही से लिया जाता है। हालांकि उनकी बातों पर हमेशा जेडीयू आपत्ति जताती थी।

तेजस्वी यादव अक्सर कहा करते थे कि अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में आरसीपी टैक्स देना होता है। अधिकारी कितना भी गलती करता रह जाए, कितने भी गंभीर मामलों से जुड़ा हो लेकिन कोई उसका बाल बांका नहीं कर सकता क्योंकि उसने RCP टैक्स देने का काम किया है। इससे पहले भी तेजस्वी यादव ने RCP टैक्स को लेकर अलग-अलग मंचों से इस तरह का बयान दिया था।

मधुबनी में तेजस्वी यादव ने कहा था कि बिहार में एक अलग तरह का टैक्स लगता है, जो RCP टैक्स है। इसके तहत रिश्वत की खुलेआम वसूली की जा रही है।

अब समय का चक्र उल्टा घूम चुका है। आरसीपी टैक्स की बात नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव नहीं कर रहे हैं। अब तो आरसीपी सिंह की पार्टी ने ही उनसे सफाई मांगी है। बिहार विधानसभा में आरसीपी का नाम लेकर नीतीश कुमार पर हमला करनेवाले तेजस्वी यादव खामोश हैं। उनकी पार्टी आरजेडी ने भी कुछ खास नहीं कहा। सोशल मीडिया पर तेजस्वी ने न तो आरसीपी सिंह के बारे में कुछ कहा और ना ही नीतीश के बारे में। आरसीपी सिंह की पार्टी जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष ने उनसे 40 बीघा जमीन पर सफाई मांगी है। मगर आरजेडी का पूरा कुनबा खामोश है।

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