नीतीश के खिलाफ षड्यंत्र किया गया, आरसीपी के रूप में दूसरा चिराग तैयार किया जा रहा था – ललन सिंह

पटना,              जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्र में जदयू कोटे से पूर्व मंत्री रहे आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद जदयू सतर्क और हमलावार हैं। रविवार को जदयू प्रदेश कार्यालय में विशेष रूप से आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि आरसीपी के रूप में दूसरा चिराग पासवान तैयार किया जा रहा था। नीतीश कुमार के नेतृत्व में हम लोग इस बात को लेकर सतर्क थे। देर-सबेर आरसीपी सिंह को तो जदयू से जाना ही था। दरअसल उनका तन यहां और मन कहीं और था। यह सभी को पता है कि उनका मन कहां था। ललन ने कहा कि नीतीश के खिलाफ षड्यंत्र किया गया था, पर उनकी बनाई लकीर अमिट है।

ललन सिंह ने ऐलान करते हुए कहा कि जदयू नरेंद्र मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हम सीएम नीतीश कुमार के 2019 के फैसले पर कायम हैं। साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल होने को लेकर उन्होंने कहा कि वे कैसे मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे, ये वही बताएंगे। वहीं भाजपा के साथ 2024 लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन को लेकर ललन सिंह ने कहा कि कल किसने देखा है।

मालूम हो कि बिहार में एनडीए की साथी होने की वजह से बीजेपी ने केंद्र सरकार में जेडीयू को एक मंत्रि पद दिया था, जिसके जरिए तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को केंद्रीय मंत्री बनाया गया था। हालांकि, आरसीपी सिंह के राज्यसभा से कार्यकाल खत्म होने के बाद जेडीयू से उन्हें फिर उच्च सदन नहीं भेजा गया। इसी वजह से आरसीपी सिंह को केंद्रीय मंत्री पद से अपना इस्तीफा देना पड़ा था।

ललन सिंह ने कहा कि आरसीपी स्वतंत्र हैं। जहां मन करे स्वेच्छा से वहां चले जाएं। जदयू से उनके त्यागपत्र पर हमें कुछ नहीं कहना है पर उन्होंने जो बातें कहीं हैं वह सुनकर आश्चर्य होता है। नीतीश कुमार के खिलाफ वह व्यक्ति बोल रहा है जिस पर नीतीश कुमार ने लंबे समय तक भरोसा किया। वह क्या जानते हैं समता पार्टी और जदयू के बारे में? एबीसीडी तक का ज्ञान नहीं। वे संघर्ष नहीं, सत्ता के साथी रहे हैं। वह कह रहे कि जदयू डूबता हुआ जहाज है। उन्हें मालूम होना चाहिए कि जदयू दौड़ता हुआ जहाज है। कुछ लोगों ने इस जहाज में छेद कर दिया था। जहाज को मरम्मत कर ऐसे लोगों का अलग किया गया है।

ललन सिंह ने कहा कि 2009 में आरसीपी सिंह लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे पर नीतीश कुमार ने मना कर दिया। इसके बाद वह राज्यसभा भेजे गए। नीतीश कुमार ने खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़कर आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। पार्टी के मालिक नीतीश कुमार हैं। केयर टेकर के रूप में काम कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने खुद को मालिक समझ लिया। दरअसल सत्ता चले जाने के बाद आरसीपी बौखलाहट में हैं।

ललन सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के खिलाफ षड्यंत्र हुआ था, इसीलिए सीट 43 पर आ गई। षड्यंत्र करने वाले अगर नीतीश कुमार द्वारा बनाई गई लंबी लकीर को मिटाने का प्रयास कर रहे पर वह अमिट है। उन्होंने कहा कि आरसीपी सिंह बूथ स्तर पर जदयू के अध्यक्ष बना दिए जाने की बात कर रहे। एक मार्च 2020 को उन्होंने पटना में बूथ अध्यक्षों का सम्मेलन किया था। दावा किया गया था कि पांच लाख लोग आए। सभी को यह पता है कि कितने लोग आए थे। जदयू में यह संस्कृति नहीं रही है कि जहां जाना है वहां एक दिन पहले माला पहुंचा दीजिए। आश्चर्य है कि आरसीपी सिंह मुख्यमंत्री के भूंजा खाने पर टिप्पणी कर रहे। विकास के इतने काम हुए तो उसे किसने किया?

ललन सिंह से जब बिहार में एनडीए की अंदरूनी स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आल इज वेल। उप राष्ट्रपति चुनाव में हम लोगों ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट किया। बीमार बशिष्ठ नारायण सिंह ने तो व्हील चेयर पर जाकर मतदान किया। महंगाई पर राजद के प्रदर्शन पर ललन ने कहा कि मंहगाई तो बढ़ी ही है। यह जनता का मुद्दा है।

पिछले चार कार्यक्रमों में नीतीश कुमार के ना शामिल होने की वजह से भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को जेडीयू विधायकों की बैठक बुलाई है। इसके अलावा पार्टी के सांसदो को भी सोमवार तक पटना पहुंचने को कहा गया है। उधर बात करें राजद की तो हलचल उधर भी कम नहीं है। मंगलवार को राजद ने भी राबड़ी देवी के आवास पर विधायकों की बैठक बुलाई है। इस हलचल पर जब बिहार में भाजपा अध्यक्ष संजय जयसवाल से प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा कि जेडीयू में क्या चल रहा है यह तो वही बता सकती है।

पिछले एक महीने पर ही गौर करें तो देखने में आता है कि भाजपा और जेडीयू के  बीच सब ठीक नहीं चल रहा है। कई बार ऐसा हुआ है जब कि केंद्र के कार्यक्रमों में नीतीश कुमार शामिल नहीं हुए। सबसे पहले 17 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई गई थी। इसमें नीतीश कुमार नहीं शामिल हुए थे। इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के विदाई भोज में भी आमंत्रण के बावजूद नीतीश कुमार नहीं पहुंचे। इसके बाद 25 जुलाई को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहम समारोह में भी बिहार के सीएम को बुलाया गया था लेकिन वह नहीं पहुंचे। फिर 7 अगस्त को पीएम मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की बैठक थी लेकिन नीतीश कुमार ने इससे भी कन्नी काट लिया। इसी वजह से कयास  लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में नीतीश और एनडीए के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो जाहिर सी बात है कि बिहार में भाजपा-जेडीयू गठबंधन की सरकार गिर जाएगी।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि नीतीश कुमार ने सोनिया गांधी से भी संपर्क किया है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

 

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