नीतीश कुमार ने 8वीं बार ली बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ, तेजस्वी यादव बने उप मुख्यमंत्री

पटना,             जदयू नेता नीतीश कुमार ने आठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। पटना स्थित राजभवन में राज्यपाल फागू चौहान ने बुधवार दोपहर में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ ही राजद नेता तेजस्वी यादव ने उप मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। वे दूसरी बार राज्य के उप मुख्यमंत्री बने हैं। तेजस्वी ने शपथ ग्रहण के बाद अपने चाचा नीतीश के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। हालांकि पहले भी वो बिहार के सीएम थे लेकिन, पिछली बार वो एनडीए गठबंधन में थे। इस बार वे महागठबंधन के साथ बिहार में सरकार बना चुके हैं। नीतीश की कैबिनेट का विस्तार आगामी कुछ दिनों में किया जाएगा।

नीतीश ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कहा कि साल 2020 में वो मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे। उनका बयान भाजपा के उस हमले की प्रतिक्रिया के तौर पर आया है जिसमें भाजपा ने कहा था कि 2020 में जेडीयू तीसरे नंबर की पार्टी रही लेकिन, नीतीश कुमार को पीएम मोदी के कहने पर सीएम बनाया गया। नीतीश कुमार ने कहा कि उनके मन में सीएम पद की कभी लालसा नहीं रही।

नीतीश कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी पर बिना नाम लिए ही हमला बोलते हुए कहा कि क्या 2014 में आने वाले 2024 में रह जाएंगे? हम रहें या न रहें, वो 2024 में नहीं रह जाएंगे। नीतीश कुमार ने भाजपा संग गठबंधन तोड़ने पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि बीते दो महीने से हम कोई बातचीत नहीं कर रहे थे, जो हो रहा था, वह गलत था। नीतीश कुमार ने कहा कि 2020 के चुनाव में जेडीयू के साथ क्या बर्ताव हुआ था। हमारा भाजपा के साथ जाने से नुकसान हुआ था।

नीतीश कुमार ने कहा कि हमारी पर्टी के सब लोग बोलते रहे कि भाजपा को छोड़ दिया जाए। इसलिए हमने यह फैसला लिया था। पीएम पद की दावेदारी को लेकर कहा कि यह सब छोड़ दीजिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि विपक्ष खत्म हो जाएगा। हम भी तो विपक्ष में ही आ गए हैं। देश भर में घूमकर विपक्ष को मजबूत करने के सवाल पर नीतीश कुमार ने कहा कि हम आगे सब कुछ करेंगे। हम चाहेंगे कि पूरा विपक्ष एक होकर आगे बढ़े और प्लान तैयार करे। इन लोगों को 2014 में बहुमत मिला था, लेकिन अब तो 2024 आ रहा है।

नीतीश ने कहा कि हम लोगों ने उनको सपोर्ट किया, लेकिन उनकी तरफ से जेडीयू को ही खत्म करने की कोशिश की गई। इसीलिए हम पुरानी जगह पर चले गए। वाजपेयी और मोदी के बीच अंतर को लेकर पूछने पर नीतीश कुमार ने कहा कि वह तो बहुत प्रेम करते थे। उसे हम भूल नहीं सकते हैं। उस समय की बात ही दूसरी थी। अटल जी और उस वक्त के लोगों का जो प्रेम था, उसे भूला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी पर कुछ नहीं कहना है। हमने एक आदमी दिया था, वह तो उनका ही हो गया। यह बात कहकर उन्होंने सीधे तौर पर आरसीपी सिंह पर निशाना साध दिया।

तेजस्वी यादव ने शपथ के बाद कहा कि हम नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में बिहार को आगे ले जाएंगे। हम जल्दी ही नौजवानों के लिए रोजगार पर कुछ करेंगे। भाजपा के धरने पर बैठने को लेकर तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके बारे में हम क्या कहें। बैठे रहने दो। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया गया। उनकी ही सरकार है, दिल्ली में ही धरना दें और वाजिब हक बिहार को दिलाएं।

शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचीं तेजस्‍वी यादव की मां और बिहार की पूर्व मुख्‍यमंत्री राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार के सवाल पर कहा कि ‘सब माफ है।’ बता दें कि कल इस्‍तीफा देने के बाद नीतीश कुमार ने 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी। राबड़ी देवी के आवास पर ही नीतीश कुमार, तेजस्‍वी यादव और महागठबंधन के अन्‍य नेताओं के बीच आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। इस दौरान नीतीश कुमार के साथ जेडीयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राजीव रंजन सिंह भी उर्फ ललन सिंह भी मौजूद रहे।

भाजपा सांसद सुशील मोदी ने भविष्यवाणी की कि 2025 में अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही यह सरकार गिर जाएगी। सुशील मोदी ने कहा कि जद (यू) सुप्रीमो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के लोगों का अपमान किया, जिन्होंने एनडीए को वोट दिया था। सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार “राजद को छोड़ देंगे और राजद प्रमुख लालू प्रसाद की बीमारी का फायदा उठाकर इसे विभाजित करने की कोशिश करेंगे।”

उन्होंने जद (यू) के आरसीपी सिंह के माध्यम से रची गई “साजिश” के दावों को गलत करार दिया। सुशील मोदी ने कहा कि यह सफेद झूठ है कि बिना पूछे ही आरसीपी सिंह को मंत्री बना दिया गया। अमित शाह ने इसके लिए फोन किया था और एक नेता का नाम मांगा था। नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह का नाम देते हुए कहा था कि ललन सिंह नाराज होंगे, उनका भी ख्याल रखना होगा। लेकिन खुद ही आरसीपी का नाम भी दिया। आपको गठबंधन तोड़ना है तो तोड़ दे, लेकिन इस तरह के झूठ का प्रचार नहीं होना चाहिए। आप तो इतने ताकतवर थे कि जब चाहते, आरसीपी सिंह को हटवा देते।

उन्होंने कहा कि हम देखना चाहेंगे कि नई बिहार सरकार (राजद नेता) तेजस्वी के साथ वास्तविक मुख्यमंत्री के रूप में कैसे काम करती है, यह अगले चुनावों से पहले गिर जाएगी।

सुशील मोदी ने नीतीश कुमार की ताकत पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आपके नाम पर वोट मिला होता तो फिर 2020 में 43 सीटें ही नहीं जीतते।

उन्होंने कहा कि जेडीयू को तोड़ने की बातें हो रही हैं, यह भी गलत बात है। शिवसेना का उदाहरण दिया जा रहा है, लेकिन वह हमारे साथ नहीं थी। हमने किसी सहयोगी दल को तोड़ा नहीं है। हमने आज तक किसी को धोखा नहीं दिया। हमने 5 बार नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया। आपने दोनों बार एक झटके में संबंध तोड़ दिया। सुशील मोदी ने कहा कि यदि हम पूरी जेडीयू को ही अपने में ले आते तो भी सरकार नहीं बन पाती। ऐसे में जेडीयू को तोड़ने की बात गलत है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की ओर से जनता को धोखा दिया गया है।

सुशील मोदी ने कहा कि मैंने खुद 2005 में नीतीश कुमार के नाम का ऐलान मुख्यमंत्री के तौर पर किया था। आपकी पार्टी के विरोध के बाद भी ऐसा किया गया, लेकिन आपने धोखा दे दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जनता के साथ ही विश्वासघात नहीं है। 2020 में नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मिला था। यदि आपके नाम पर वोट मिलता तो 43 सीट ही आपको नहीं मिलती। जब हमें लगा कि स्थिति कमजोर है तो फिर नरेंद्र मोदी ने प्रचार में पूरी जान लगा दी थी। यदि आपके नाम पर भी वोट मिलता तो हम 175 तक सीटें जीत कर सत्ता में आते।

राज्य में मंत्रिपरिषद के गठन की कवायद शुरू हो गई है। नीतीश कुमार की नई सरकार में अधिकतम 35 विधायक मंत्री बन सकते हैं। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार के नए मंत्रिपरिषद में आरजेडी के सबसे ज्यादा मंत्री होंगे। वहीं, जेडीयू से अधिकतर पुराने चेहरों को शामिल किया जाएगा। कांग्रेस के चार और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के एक विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है।

बिहार में मौजूदा विधायकों की संख्या के मुताबिक मुख्यमंत्री को छोड़कर 35 मंत्री बन सकते हैं। किस पार्टी के कितने नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल किया जाएगा, इसका ऐलान अभी नहीं हुआ है। मगर कैबिनेट में पावर शेयरिंग का फॉर्मूला लगभग तय हो चुका है।

बिहार में कुल विधायकों की संख्या 243 है। इनमें से 164 विधायकों ने नीतीश कुमार को समर्थन दिया है। हालांकि वामदलों ने सरकार में शामिल नहीं होने का फैसला लिया है, वे सिर्फ बाहर से महागठबंधन को समर्थन देंगे। ऐसे में देखा जाए तो 143 विधायक ही सीधे तौर पर सरकार का हिस्सा रहेंगे। इनमें से अधिकतम 35 को मंत्री बनाया जा सकता है। यानी कि चार विधायकों पर एक विधायक का फॉर्मूला लागू हो सकता है।

बिहार विधानसभा में लालू प्रसाद यादव की आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी है। इसलिए आरजेडी कोटे से सबसे ज्यादा 16 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं जेडीयू कोटे से 13 मंत्री बनने की चर्चा है। इसके अलावा कांग्रेस से अधिकतम चार, जीतनराम मांझी की हम से एक मंत्री बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सबसे अहम माने जाने वाला गृह विभाग अपने पास ही रखेंगे। चर्चा थी कि तेजस्वी यादव ने उनसे यह विभाग मांगा था। मगर जब भी नीतीश मुख्यमंत्री बने, गृह विभाग उनके पास ही रहता है। इससे राज्य में पुलिस और कानून व्यवस्था का पूरा कंट्रोल उन्हीं के पास होता है। तेजस्वी यादव को शिक्षा या सड़क निर्माण जैसे अहम विभाग दिए जा सकते हैं। वहीं, बीजेपी के पास जो पुराने पोर्टफोलियो थे, वे आरजेडी, कांग्रेस और हम के हिस्से जाने हैं।

नीतीश कुमार की नई मंत्रिपरिषद में जेडीयू कोटे से लगभग पुराने नेताओं को ही शामिल किया जाएगा। जेडीयू संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को भी मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं, राजद कोटे से तेजस्वी यादव उप मुख्यमंत्री बन रहे हैं। उनके अलावा तेज प्रताप यादव, डॉ. रामानंद यादव, आलोक कुमार मेहता, चंद्रशेखर, सुनील कुमार सिंह, भाई वीरेंद्र, अनीता देवी, सुरेंद्र यादव का नाम चर्चा में है। कांग्रेस की ओर से अजीत शर्मा, मदन मोहन झा, शकील अहमद औऱ राजेश राम को मंत्री बनने की रेस में सबसे आगे हैं। हम से संतोष कुमार सुमन का मंत्री बनना लगभग तय है। वहीं निर्दलीय सुमित कुमार सिंह भी मंत्री बन सकते हैं, वे एनडीए सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

महागठबंधन सरकार में विधानसभा अध्यक्ष का पद राजद के हिस्से में जाने के आसार हैं। राजद में सबसे वरिष्ठ और सुलझे हुए विधायक अवध बिहारी को विधानसभा स्पीकर बनाया जा सकता है।

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