राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदीप धनखड़ को 14वें उपराष्ट्रपति पद की दिलाई शपथ

नई दिल्ली,                  पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने देश के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। धनखड़ ने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 346 मतों के अंतर से हराया था।

लोकसभा सचिवालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 780 मतों में से 725 ने मतदान किया। इनमें से धनखड़ को 528 मत मिले जबकि अल्वा को 182 मत मिले। 50 अनुपस्थित रहे और 15 मत अवैध पाए गए।

धनखड़ जो राज्यसभा के अध्यक्ष भी होंगे। वह वैंकेया नायडू की जगह लेंहे। धनखड़ का जन्म राजस्थान झुंझुनू में हुआ था। राजस्थान के झुंझुणूं जिले में एक सुदूर किठाना गांव में कृषि परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति तक का सफर बेहद दिलचस्प है। जगदीप धनखड़ साल 1989 में जनता दल पार्टी के सांसद के तौर पहली बार राजस्थान के झुंझुणूं जिले से संसद पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं दी। 1993 में वे अजमेर जिले के किशनगढ़ से राजस्थान विधानसभा पहुंचे। साल 2019 में उन्हें केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। जगदीप धनखड़ ने 1979 में वकालत की शुरुआत की, लेकिन 35 साल की उम्र में हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष बने. वहीं सबसे युवा सीनियर एडवोकेट नामित होने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम दर्ज है। 1990 में वे वरिष्ठ अधिवक्ता हो गए थे और बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य भी निर्वाचित हुए. वकालत के पेशे में धनखड़ के जूनियर रहे कई अधिवक्ता आज बड़े पदों पर हैं। इनमें जस्टिस आरएस चौहान मुख्य न्यायाधीश के पद से रिटायर हुए. वहीं, जस्टिस एसपी शर्मा पटना हाईकोर्ट में जज हैं वे भी धनखड़ के जूनियर रहे। धनखड़ ने अपनी राजनीति की शुरुआत जनता दल से की थी। दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय बैठक भी धनखड़ के गृह जिले झुंझुनू में हुई थी। अपने समय के अधिकांश जाट नेताओं की तरह धनखड़ भी मूल रूप से देवीलाल से जुड़े हुए थे। युवा वकील रहे धनखड़ का राजनीतिक सफर तब आगे बढ़ना शुरू हुआ, जब देवीलाल ने उन्हें 1989 में कांग्रेस का गढ़ रहे झुंझुनू संसदीय क्षेत्र से विपक्षी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा और वहां उन्होंने जीत भी दर्ज की। धनखड़ 1989 में झुंझुनू से सांसद बने। पहली बार सांसद चुने जाने पर ही उन्हें बड़ा इनाम मिला। 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में उन्हें केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया था।

शपथ ग्रहण से पहले उन्होंने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।

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