लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयार्क में चाकू से जानलेवा हमला

न्यूयॉर्क,                     भारतीय मूल के अंग्रेजी भाषा के प्रख्यात लेखक सलमान रुश्दी (75) पर शुक्रवार को न्यूयार्क में चाकू से जानलेवा हमला हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक कार्यक्रम में व्याख्यान देने गए रुश्दी को हमलावर ने कई मुक्के मारे, इसके बाद चाकू से कई वार किए। चाकू प्रहार से उनकी गर्दन में गहरा घाव हो गया है। हमले से घायल होकर रुश्दी मंच पर ही गिर गए। कुछ ही क्षणों में पहुंचे सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर से बचाकर उन्हें हेलीकाप्टर से अस्पताल भेजा। हालांकि अभी उनकी स्थिति कैसी है इस बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। न ही इस बात का पता चला है कि हमलावर कौन है। न्यूयॉर्क पुलिस ने छुरा घोंपे जाने की पुष्टि की है

पुलिस ने बताया कि हमलावर को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है।

न्‍यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की ओर से कहा गया है कि उसके रिपोर्टर ने चौटाक्‍वा इंस्‍टीट्यूशन (Chautauqua Institution) में शख्‍स को तेजी से मंच पर आते हुए देखा। जब लेखक का परिचय दिया जा रहा था तो इस शख्‍स ने रुश्‍दी को चाकू मारा। हमला इतनी तेज था कि वे फर्श पर गिर पड़े। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने लेखक को किसी तरह बचाया और उन्हें अलग लेकर गए। बाद में इस शख्‍स को पकड़ लिया गया।

मुंबई में पैदा हुए सलमान रुश्दी दुनियाभर में अपने लेखन के लिए फेमस हैं। उनके लेखन के लिए 1980 के दशक में उन्हें ईरान से जान से मारने की धमकी मिली थी। रुश्दी की किताब “द सैटेनिक वर्सेज” को ईरान में 1988 से बैन कर दिया गया है। कई मुसलमान इसे ईशनिंदा मानते हैं। एक साल बाद, ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने एक फतवा जारी किया था, जिसमें रुश्दी को जान से मारने को कहा गया था।

रुश्दी की हत्या करने वाले को 30 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक का इनाम देने की भी पेशकश की गई। उनके खिलाफ कई इस्लामिक नेताओं ने फतवा जारी किया हुआ है। ईरान की सरकार लंबे समय से खमनेई के फरमान से दूरी बनाए हुए है, लेकिन लोगों में रुश्दी विरोधी भावना बनी हुई है।

न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने कहा कि सलमान रुश्दी जीवित हैं। उन्‍हें एयरलिफ्ट किया गया है… इवेंट मॉडरेटर पर भी हमला किया गया जिसका स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है।

रुश्दी सन 2000 के बाद अमेरिका चले गए थे। शुक्रवार को वह पश्चिमी न्यूयार्क के चौटौक्वा इंस्टीट्यूशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गए थे, वहीं उन पर व्याख्यान देने से पहले हमला हुआ। रुश्दी को मिडनाइट्स चिल्ड्रेन के लिए 1981 में प्रतिष्ठित बुकनर अवार्ड मिला था।

भारत में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहीं बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने रुश्दी पर हमले को स्तब्धकारी बताया है और उसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। तस्लीमा अपने लिखे उपन्यास लज्जा के कुछ अंशों के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।

बता दें कि सलमान रुश्दी का जन्म मुंबई में हुआ था। ‘द सैटेनिक वर्सेस’ और ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन’ जैसी किताबें लिख कर चर्चा में आए रुश्दी को बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। 75 साल के सलमान रुश्दी ने अपनी किताबों से दुनिया भर में ख्याती प्राप्त की है। अपने दूसरे ही उपन्यास ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन’ के लिए 1981 में ‘बुकर प्राइज’ और 1983 में ‘बेस्ट ऑफ द बुकर्स’ पुरस्कार से सम्मानित किए गए हैं। रुश्दी ने लेखक के तौर पर शुरुआत 1975 में अपनी पहली नॉवेल ‘ग्राइमस’ के साथ की थी।

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