व्लादिमीर पुतिन ने 3 लाख रिजर्व रूसी सैनिकों के तैनाती के दिए आदेश

नई दिल्ली,            यूक्रेन युद्ध में व्लादिमीर पुतिन ने 3 लाख रिजर्व रूसी सैनिकों के तैनाती के आदेश दिए हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है, जब रूस इतनी बड़ी तादाद में सैन्य तैनाती करने जा रहा है। उनके इस फैसले से पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देश रूस को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर हमारे देश की क्षेत्रीय अखंडता को खतरा पैदा होता है तो हम हम अपने लोगों की रक्षा के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करेंगे। पुतिन ने अमेरिका और नाटो को न्यूक्लियर ब्लैकमेल करने पर भी चेतावनी दी।

पुतिन ने कहा कि यह कोई मजाक नहीं है, हम पूरी ताकत के साथ अपने शस्त्रागारों का इस्तेमाल करेंगे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती से पुतिन का प्लान क्या है।

पुतिन की सैन्य तैनाती एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वह जल्द से जल्द पूर्वी यूक्रेन के कब्जा किए गए चार क्षेत्रों को रूस में शामिल करने की योजना बना रहे हैं। रूसी सेना पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन के दो-दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कब्जा जमा चुकी है। जल्द ही इन इलाकों को औपचारिक रूप से रूस में शामिल करने के लिए जनमत संग्रह करवाया जाएगा। रूसी कब्जे वाले क्षेत्र के अधिकारियों ने बताया है कि जनमत संग्रह के लिए मतदान 23 सितंबर से शुरू होकर 27 सितंबर तक चलेगा। ऐसे में यूक्रेन भी पूरी ताकत के साथ रूस को जवाब देने की कोशिश कर सकता है। इसी हालात से निपटने के लिए पुतिन ने तीन लाख रिजर्व सैनिकों की तैनाती का फैसला लिया है।

रूस के इस फैसले पर यूक्रेन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। यूक्रेन ने जनमत संग्रह के फैसले को रूस का स्टंट करार दिया है। यू्क्रेनी विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने ट्वीट किया कि यह सिर्फ दिखावा है। जनमत संग्रह से कुछ भी नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेनी भूमि के कुछ हिस्सों पर अवैध रूप से कब्जा करने वाला एक हमलावर रहा है और बना हुआ है। यूक्रेन को अपने क्षेत्रों को मुक्त करने का पूरा अधिकार है।

यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में तैनात रूसी अधिकारियों के अनुसार, जनमत संग्रह के लिए पहले डोनबास क्षेत्र के स्व-घोषित डोनेट्स्क और लुहान्स्क गणराज्यों में वोट होंगे। फरवरी में यूक्रेन में सेना भेजने से कुछ समय पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन दोनों इलाकों को स्वतंत्र क्षेत्र के रूप में मान्यता दी थी। इसके अलावा दक्षिणी खेरसॉन क्षेत्र में भी जनमत संग्रह कराया जाएगा। इस इलाके पर रूसी सेना ने आक्रमण के शुरुआती दिनों में ही कब्जा कर लिया था। यूरोप के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट ज़ापोरिज़िया में भी रूस जनमत संग्रह करवाने की तैयारी में है। इस प्लांट के अंदर यूक्रेनी अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे हैं, जबकि सुरक्षा की जिम्मेदारी रूसी सेना के हाथ में है।

बड़ी बात यह है कि रूस इन चारों क्षेत्रों में से किसी को भी पूरी तरह से नियंत्रित नहीं करता है। सिर्फ डोनेट्स्क क्षेत्र का लगभग 60 प्रतिशत रूसी हाथों में है। जनमत संग्रह के बारे में पूछे जाने पर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ऑपरेशन की शुरुआत से … हमने कहा कि संबंधित क्षेत्रों के लोगों को अपने भाग्य का फैसला करना चाहिए और पूरी वर्तमान स्थिति इस बात की पुष्टि करती है कि वे अपने भाग्य के स्वामी बनना चाहते हैं। आशंका जताई जा रही है कि रूस के जनमत संग्रह के फैसले से यूरोप में तनाव और ज्यादा भड़क सकता है।

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