गहलोत समर्थक विधायकों को सचिन पायलट मंजूर नहीं, इस्तीफे का किया ऐलान

जयपुर,                  राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समर्थक विधायकों ने साफ कर दिया है कि उन्हें राजस्थान में सचिन पायलट को सत्ता सौंपना मंजूर नहीं है। कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बनाने के लिए गहलोत गुट के सभी विधायकों ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है। गहलोत गुट के सभी विधायक स्पीकर सीपी जोशी को अपना इस्तीफा सौंपने पहुंच गए हैं। इस बीच खुद स्पीकर सीपी जोशी के भी इस्तीफे की खबर सामने आ रही है।

राजस्थान सरकार में मंत्री और गहलोत के करीबी प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि सभी विधायक गुस्से में हैं और इस्तीफा दे रहे हैं। हम इसके लिए अध्यक्ष के पास जा रहे हैं। विधायक इस बात से खफा हैं कि CM अशोक गहलोत उनसे सलाह लिए बिना फैसला कैसे ले सकते हैं। खाचरियावास ने 92 विधायकों के इस्तीफे की बात कही है। बताया जा रहा है कि अभी तक 83 विधायकों ने इस्ताफे सौंप दिए हैं।

आज शाम सीएम अशोक गहलोत के घर पर विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। इसके लिए दिल्ली से पर्यवेक्षक बनाकर वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रभारी अजय माकन को जयपुर भेजा गया था। विधायक दल की बैठक में विधायकों को यह प्रस्ताव पारित करने को कहा गया था कि आलाकमान नए मुख्यमंत्री का फैसला करेगा। बताया जा रहा है कि हाईकमान ने सचिन पायलट को सीएम पद सौंपने का मन बना लिया है और गहलोत को यह मंजूर नहीं है। उनका कहना है कि हाईकमान ने उनकी राय नहीं ली है।

इससे पहले मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन, सचिन पायलट और करीब दो दर्जन विधायक अशोक गहलोत के घर पहुंच चुके थे। लेकिन गहलोत गुट के विधायक बैठक में नहीं पहुंचे। इस बीच विधायक दल की बैठक को रद्द कर दिया गया है। अब राजस्थान की राजनीतिक का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह देखना अब और भी अधिक दिलचस्प हो गया है।

गहलोत के इस रुख से पार्टी हाईकमान बेहद हैरान है। सूत्रों के मुताबिक, अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के कहने पर केसी वेणुगोपाल ने गहलोत को फोन किया है और उनसे पूछा गया कि जयपुर में क्या चल रहा है? बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि उनके बस में कुछ नहीं है। उन्होंने कहा है कि यह विधायकों का निजी फैसला है और इसमें उनका कोई हाथ नहीं। इसके बाद वेणुगोपाल ने खड़गे से भी बात की है। आलाकमान ने आज रात ही पूरे मामले को सुलझाने को कहा है। हर विधायक से बात करके रात में ही हल निकालने को कहा गया है।

दिल्ली से भेजे गए पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन की मौजूदगी में आज शाम गहलोत के आवास पर विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। बताया जा रहा है कि विधायकों को इसमें एक प्रस्ताव पास करने को कहा जाने वाला था कि नए मुख्यमंत्री के चुनाव के लिए हाईकमान को अधिकृत किया जाता है। गहलोत गुट को इस बात की आशंका है कि हाईकमान सचिन पायलट को सत्ता सौंपने जा रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कड़वाट किसी से छिपी नहीं है। 2018 की बगावत के बाद से ही गहलोत को पायलट खटकते रहे हैं।

अशोक गहलोत गुट के इस दांव को राजनीतिक पंडित भी बेहद हैरानी से देख रहे हैं। इसे इस रूप में भी देखा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले ही गहलोत ने गांधी परिवार को अपनी ताकत दिखा दी है। इसे गांधी परिवार को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने सचिन पायलट से 2020 में किया वादा निभाने का फैसला कर लिया था। 2018 में कांग्रेस को राजस्थान की सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाने वाले पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की प्रबल संभावना थी। लेकिन अशोक गहलोत को पायलट मंजूर नहीं हैं। यह तो पहले से संभावना थी कि गहलोत पायलट की जगह अपने किसी और करीबी को कुर्सी सौंपना चाहेंगे, लेकिन इस तरह विधायक इस्तीफा देंगे और परोक्ष रूप से गांधी परिवार को चुनौती दी जाएगी, यह कल्पना किसी ने नहीं की थी।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वफादार विधायकों ने अपने इस्तीफे सौंपने के लिए रविवार रात विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी के आवास जाने का फैसला किया।
खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के निवास पर गहलोत समर्थक विधायकों की बैठक में 92 व‍िधायक शामिल हुए। उन्‍होंने कहा कि यह विधायक अपना इस्‍तीफा डॉ जोशी को सौंपेगे। ये विधायक धारीवाल के घर से एक बस में सवार होकर जोशी के घर पहुंचे।

उन्‍होंने कहा कि विधायक चाहते हैं कि पार्टी आलाकमान उनकी बात सुनकर ही राज्‍य में नेतृत्‍व परिवर्तन के बारे में कोई फैसला करे। वहीं कांग्रेस विधायक दल की बैठक के लिए दिल्‍ली से आए पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे व अजय माकन रविवार रात लगभग मुख्‍यमंत्री निवास पर पहुंचे।

 

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